‘'माँ "
माँ’ केवल एक शब्द नहीं, पूरी सृष्टि की पहली पाठशाला है।
किसी भी बालक के जीवन की सबसे पहली गुरु उसकी माँ होती है।
जन्म के बाद बच्चा सबसे अधिक समय अपनी माँ के आँचल में बिताता है। वह माँ की आँखों से संसार को देखना और उसके वचनों से बोलना सीखता है।
माँ केवल चलना नहीं सिखाती, बल्कि जीवन के हर कदम पर सही और गलत का अंतर भी सिखाती है।
माँ की इस अलौकिक शक्ति और भूमिका का सार छुपा है इस खूबसूरत एक्रोनम में:
M – Maker of Character — चरित्र का निर्माण करने वाली
A – Anchor of Love — निस्वार्थ प्रेम का अटूट लंगर
A – Awakens the Purpose of Life — जीवन के उद्देश्य को जागृत करने वाली
M – Maker of Character — चरित्र को अपने संस्कारों से आकार देने वाली
"जीजाबाई "
चरित्र जन्मजात नहीं होता; वह माँ के दिए संस्कारों से आकार लेता है।
राजमाता जीजाबाई जब बालक शिवाजी को पालने में झुलाती थीं, तब वे उन्हें केवल लोरियाँ नहीं सुनाती थीं। रामायण और महाभारत के शौर्य, मर्यादा, न्याय और धर्म की कथाएँ उनके मन में उतारती थीं। इन्हीं संस्कारों ने एक बालक को आगे चलकर राष्ट्रनायक और धर्मरक्षक बनाया।
एक माँ केवल बच्चे को बड़ा नहीं करती—वह उसके चरित्र की नींव रखती है।
A – Anchor of Love:
"माता कुंती और पांडव"
जब बच्चों के जीवन में परिस्थितियाँ तूफान बन जाती हैं, तब माँ अपने बच्चों के लिए लंगर बन जाती है—उन्हें डगमगाने नहीं देती, टूटने नहीं देती और कठिन से कठिन परिस्थिति में उनका हाथ नहीं छोड़ती।
माता कुंती इसका अद्भुत उदाहरण हैं।
पांडवों के जीवन में एक के बाद एक संकट आए—पिता का बचपन में ही देहांत, हस्तिनापुर में असुरक्षा, लाक्षागृह की घटना, वनवास और अनेक कठिनाइयाँ। लेकिन इन परिस्थितियों में कुंती ने अपने पुत्रों का साथ कभी नहीं छोड़ा।
उन्होंने स्वयं भी कष्ट सहे, लेकिन अपने बच्चों को धैर्य, एकता और धर्म के मार्ग पर बनाए रखा।
माँ का प्रेम केवल तब नहीं होता जब बच्चा सफल हो रहा हो। माँ वह होती है जो बच्चे के जीवन के सबसे कठिन समय में भी उसके साथ खड़ी रहती है।
जैसे समुद्र में जहाज को लंगर तूफान में स्थिर रखता है, वैसे ही माँ का प्रेम बच्चे को जीवन के तूफानों में स्थिर रखता है।
दुनिया साथ छोड़े तो भी माँ साथ खड़ी रहती है। सब कुछ डगमगा जाए, फिर भी माँ का प्रेम बच्चे को संभाले रखता है।
२ "थॉमस एडिसन और माँ का विश्वास":-
एक दिन छोटा-सा थॉमस एडिसन स्कूल से घर आया। उसके हाथ में एक चिट्ठी थी। उसने वह चिट्ठी अपनी माँ को दी और कहा, “माँ, टीचर ने यह चिट्ठी आपको देने के लिए कहा है।”
माँ ने चिट्ठी खोली और पढ़ने लगीं। कुछ ही क्षणों में उनकी आँखों में आँसू आ गए।
छोटे थॉमस ने पूछा, “माँ, इसमें क्या लिखा है? आप रो क्यों रही हैं?”
माँ ने अपने आँसू पोंछे, बेटे की ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा— “बेटा, स्कूल वालों ने लिखा है कि तुम इतने होशियार हो कि हमारा स्कूल तुम्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है। अब तुम्हें घर पर ही पढ़ाया जाए। तुम्हारी माँ तुम्हें पढ़ाएगी।” उस दिन माँ ने अपने बेटे के सामने उसकी कमजोरी नहीं रखी— उन्होंने उसके सामने उसकी संभावना रखी।
उन्होंने उसे पढ़ाया, उसका हौसला बढ़ाया और उसके भीतर यह विश्वास जगाया कि वह बहुत कुछ कर सकता है।
आगे चलकर यही बालक थॉमस अल्वा एडिसन, दुनिया के महान आविष्कारकों में से एक बना।
एक बच्चे की क्षमता को दुनिया शायद न पहचान पाए, लेकिन एक माँ का विश्वास उस क्षमता को जगा सकता है। यही माँ है— Anchor of Love — वह अटूट लंगर, जो बच्चे को जीवन के तूफानों में टूटने नहीं देता।
A – Awakens the Purpose of Life:
"माता सुनीति और भक्त ध्रुव"
संसार हमें केवल जीने के साधन देता है, लेकिन एक महान माँ यह भी सिखाती है कि जीवन किस उद्देश्य के लिए है।
जब पाँच वर्ष के बालक ध्रुव अपने पिता की गोद से तिरस्कृत होकर रोते हुए अपनी माँ सुनीति के पास पहुँचे, तो माँ ने उनके भीतर बदले की आग नहीं भड़काई। उन्होंने उन्हें जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य दिखाया।
उन्होंने समझाया कि यदि उन्हें ऐसा स्थान चाहिए जिसे कोई उनसे छीन न सके, तो उन्हें जगत पिता भगवान विष्णु की शरण में जाना चाहिए।
माँ की उसी दिव्य प्रेरणा ने बालक ध्रुव के भीतर जीवन का परम उद्देश्य जागृत कर दिया।
ध्रुव वन में गए, कठोर तपस्या की और अंततः भगवान श्रीहरि के दर्शन प्राप्त किए। एक माँ ने अपने बच्चे को केवल यह नहीं बताया कि दुनिया में आगे कैसे बढ़ना है— उन्होंने उसे बताया कि जीवन में वास्तव में प्राप्त क्या करना है।
माँ केवल शरीर को जन्म नहीं देती। वह अपने संस्कारों से चरित्र गढ़ती है, अपने प्रेम से जीवन को संभालती है, और अपनी प्रेरणा से आत्मा को उसके परम लक्ष्य की ओर मोड़ सकती है।
इसलिए माँ केवल जन्म देने वाली नहीं— जीवन की पहली गुरु है, पहली पाठशाला है, और बच्चे के जीवन की सबसे मजबूत आधारशिला है।
शायद इसीलिए माँ का प्रेम हमें उस दिव्य प्रेम की एक झलक देता है, जो भगवान अपने प्रत्येक जीव के लिए रखते हैं।
💞हरे कृष्ण 💞
