🌸श्री कृष्ण जन्माष्टमी🌸
दिव्य आहट👣
काली अंधेरी रात थी, मूसलाधार बरसात थी। कारगार में हुए थे कृष्ण प्रकट, हरने भक्तों के सारे संकट।
कृष्ण को देख, प्रेम उमड़ आया था, देवकी-वसुदेव ने, गले से लगाया था। नेत्रों से अश्रु छलक आए थे, आज कृष्ण जीवन में आए थे।
दोनों ने बहुत ही कष्ट सहे, शब्दों में हम कितना ही कहें। कंस ने जब अत्याचार किए, नवजात शिशु कई मार दिए। आठवां शिशु उसका काल था, ये सोच कंस बेहाल था।
अब कृष्ण को गोकुल ले जाना था, कंस से उन्हें बचाना था। खुल गए थे स्वत ही सारे द्वार, सो गए वहां सब पहरेदार ।
यमुना ने मार्ग बनाया था, कृष्ण चरण का स्पर्श पाया था। शेषनाग ने था फन फैलाया, वर्षा से प्रभु को बचाया।
चंदा की भी बढ़ गई थी चमक, पाकर कान्हा की एक झलक, मन ही मन हर्षाए थे, कृष्ण उनके ही वंश में आए थे।
अद्भुत रूप, सुंदर मुस्कान, मोर मुकुट उनकी पहचान। मुरली की धुन मन को भाए, सुनकर सब मंत्रमुग्ध हो जाएँ।
हमारा हृदय भी कारागार है, जहाँ अनर्थों का घोर अंधकार है। पर इंतजार करना होगा, अहंकार तजना होगा। फिर एक दिन कृष्ण आयेंगे, हमे भी साथ ले जाएंगे।
करना चाहते हैं हृदय में कृष्ण को प्रकट, तो हो जाएं तैयार हम सहने को संकट, तब महसूस कर सकेंगे दिव्य आहट, और उनकी मन मोहक मुस्कुराहट।
