International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

ढुले ढुले गोरा चांद

Composed by अज्ञात

1
ढुले ढुले गोरा-चांद हरि गुण गाइ आसिया वृंदावने नाचे गौर राय॥
भावार्थचन्द्रमा सदृश भगवान्‌ गौरा चाँद, नृत्य करते हुए, इधर-उधर झूलते हुए और भगवान्‌ हरि की महिमा का गुणगान करते हुए, वृन्दावन में पहुँचते हैं।
2
वृंदावनेर तरुर लता प्रेमे कोय हरिकथा निकुञ्जेर पखि गुलि हरिनाम सुनाई॥
भावार्थवृन्दावन के वृक्षों को अलंकृत करती हुई उनमें लिपटी हुई लताएँ परम आनन्दित प्रेम से भाव विह्वल हो गई है और वे भगवान्‌ हरि की महिमा व यश के विषय में बोल रही हैं। पक्षियों के झुण्ड जो वृक्षों के समूह में या बगीचों मे रहते हैं, भगवान्‌ हरि के नाम का गान कर रहे हैं।
3
गौर बोले हरि हरि शारी बोले हरि हरि मुखे मुखे शुक शारी हरिनाम गाइ॥
भावार्थभगवान्‌ गौर कहते हैं, “हरि! हरि!”, एक मादा तोता (शुक) उत्तर देती है, “हरि! हरि!” और तब सारे नर एवं मादा तोते सब साथ मिलकर, जोर से हरि के नाम का सहगान करते है।
4
हरिनामे मत्त होये हरिणा आसिछे देय मयूर मयूरी प्रेमे नाचिया खेलाय॥
भावार्थपवित्र भगवन्नाम द्वारा नशे में मद होकर, हिरन वन से बाहर आ जाता है। मोर व मोरनियाँ परम आनन्दित प्रेमपूर्ण भाव में भाव विभोर होकर नृत्य कर रहे हैं तथा उल्लासपूर्ण क्रीड़ा कर रहे हैं।
5
प्राणे हरि ध्याने हरि हरि बोलो वदन भोरि हरिनाम गेये गेये रसे गले जाइ॥
भावार्थभगवान्‌ हरि उनके हृदय में हैं, भगवान्‌ हरि उनके ध्यान में हैं, और वे अपनी वाणी (आवाज) से सदा हरि के नाम का उच्चारण करते हैं। गौर चाँद परम आनन्दित प्रेम पूर्ण भाव की मधुर, रसीली, मनोरम ध्वनि द्वारा नशे में मस्त हैं और हरिनाम गाते-गाते भूमि पर घूमते हुए लुढ़कते हैं।
6
आसिया जमुनार कुले नाचे हरि हरि बोले जमुना उठोले एसे चरण धोयाइ॥
भावार्थयमुना नदी के तट पर पहुँच कर, वह “हरि! हरि!” का उच्चारण करते हुए अति उत्साहित होकर नृत्य करते हैं। माता यमुना इतनी अधिक प्रेमानन्द से भाव विभोर हो जाती है कि वह उठकर भगवान्‌ गौरांग के चरण धोने के लिए आगे आती हैं।