International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

एखोन बुझिनु प्रभु

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
एखोन बुझिनु प्रभु! तोमार चरण अशोकाभयामृत – पूर्ण सर्व – खण॥
भावार्थहे प्रभु! मैं अब समझ गया हूँ कि आपके चरण पूर्ण अमृत से भरे हैं तथा समस्त शोक और भय को नष्ट करने वाले हैं।
2
सकल छाडिया तुआ चरण – कमले पडियाचि आमि नाथ! तव पद – तले॥
भावार्थअपना सर्वस्व उन चरणकमलों पर समर्पित करके मैं आपके पादपद्मों की शरण ग्रहण करता हूँ।
3
तव पाद – पद्म नाथ! रखिबे आमारे आर रखा – कर्ता नाहि ए भव – संसारे॥
भावार्थहे नाथ! आपके चरणकमल निश्चित्‌ ही मेरी रक्षा करेंगे। इस जन्म-मृत्यु के संसार में उनके अतिरिक्त मेरा अन्य कोई संरक्षक नहीं है।
4
आमि तव नित्य – दास – जानिनु ए – बार॥
भावार्थअततः मैं जान गया कि मैं आपका नित्य दास हूँ। अब मेरे पालन का पूरा भार आपके ऊपर है।
5
आमार पालन – भार एखन तोमार बड दुःख पाइयाचि स्वतंत्र जीवने दुःख दूरे गेलो ओ पद – वरणे॥
भावार्थआपसे स्वतन्त्र जीवन व्यतीत करके मैंने दःख के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं पाया है। किन्तु अब आपके चरणकमलों को स्वीकार करने से मेरे सभी दःख दूर चले गये हैं।
6
जे पद लागिया रमा तपस्य करिला जे पद पाइया शिव शिवत्व लभिला॥
भावार्थआपके चरणकमलों पर स्थान प्राप्त करने के लिए लक्ष्मीजी ने कठोर तपस्या की। आपके चरणकमलों को प्राप्त करने पर ही शिवजी को अपना शिवत्व प्राप्त हआ।
7
जे – पद लभिया ब्रह्मा कृतार्थ होइला जे – पद नारद मुनि हृदये धरिला॥
भावार्थआपके चरणकमल प्राप्त होने पर ही ब्रह्माजी की इच्छायें पूरी हर्इं। इन्हीं चरणकमलों को श्रीनारदमुनि सदैव अपने हृदय में धारण करते हैं।
8
सेइ से अभय पद शिरेते धरिया परम – आनन्दे नाचि पद – गुण गाइया॥
भावार्थअभय प्रदान करने वाले उन्हीं चरणकमलों को मैं अपने सिर पर धारण करता हूँ और परम आनन्द में नाचते हए उनकी महिमायें गाता हूँ।
9
संसार – विपद होइते अवश्य उद्धार भक्तिविनोद, ओ – पद करिबे तोमार॥
भावार्थआपके चरणकमल निश्चित्‌ ही भक्तिविनोद का इस संसार की विपदाओं से उद्धार करेंगे।