International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

गौरांङ्ग बलिते ह’बे

Composed by नरोत्तम दास ठाकुर

1
‘गौरांङ्ग’ बलिते ह’बे पुलक-शरीर। ‘हरि हरि’ बलिते नयने ब’बे नीर॥
भावार्थवह दिन कब आयेगा कि केवल ‘श्रीगौरांङ्ग’ नाम के उच्चारण मात्र से मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा? कब, ‘हरि हरि’ के उच्चारण से मेरे नेत्रों से प्रेमाश्रु बह निकलेंगे?
2
आर क’बे निताईचाँदेर करुणा हइबे। संसार-वासना मोर कबे तुच्छ हबे॥
भावार्थकब श्रीनित्यानंद प्रभु मुझ पर अपनी कृपावर्षा करेंगे, कि जिससे मेरी समस्त भौतिक भोग की इच्छायें तुच्छ हो जायेंगी।
3
विषय छाड़िया कबे शुद्ध हबे मन। कबे हाम हेरब श्रीवृन्दावन॥
भावार्थकब मेरा मन भौतिक सुख के विषयों को त्यागकर निर्मल होगा? कब मैं श्रीवृन्दावन धाम का वास्तविक दर्शन कर पाऊँगा।
4
रूप-रघुनाथ-पदे हइबे आकुति। कबे हाम बुझब से युगल पिरीति॥
भावार्थश्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामी (षड्‌गोस्वामीवृन्द) के चरण-दर्शन के लिए कब मैं वयाकुल हो उठूँगा। कब मैं श्रीश्री राधा-कृष्ण के दिवय प्रेम-वयापार को समझने में समर्थ हो सकूँगा।
5
रूप-रघुनाथ-पदे रहु मोर आश। प्रार्थना करये सदा नरोत्तमदास॥
भावार्थश्रील नरोत्तमदास ठाकुर सदा यही प्रार्थना करते हैं ‘‘श्रील रूपगोस्वामी-श्रील रघुनाथदास गोस्वामी के चरणों में मेरी सदा आशा बनी रहे। ’’