International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

गौराङ्ग करुणा कर

Composed by नरोत्तम दास ठाकुर

1
गोराङ्ग करुणा कर, दीन हीन जने। मो-सम पतित प्रभु, नाहि त्रिभुवने॥
भावार्थहे मेरे प्रिय भगवान्‌ गौरांग कृपया इस निम्न एवं दीन-हीन आत्मा पर अपनी कृपा कीजिए। हे भगवान्‌! इन तीनों लोको में मुझसे अधिक पतित कोई भी नहीं है।
2
दन्ते तृण धरी’ गौर, डाकि हे तोमार। कृपा करी’ एसो आमार, हृदय मंदिरे॥
भावार्थहे भगवान्‌ गौर, अपने दाँतों के बीच घास के तिनके को पकड़े (या दबाए) मैं, आपको अब पुकार रहा हूँ। कृपया मुझ पर दया कीजिए एवं मेरे हृदय के मन्दिर में आकर वास कीजिए।
3
जदि दया ना करिबे, पतित देखिया। पतित पावन नाम, किसेर लागिया॥
भावार्थयदि आप अपनी कृपा प्रदान नहीं करेंगे, यह देखते हुए भी कि मैं कितना पतित हूँ, तब आप पतित- पावन क्यों कहलाते हैं, पतितों के दयालु रक्षक?
4
पडेचि भव तुफाने, नाहिक निस्तार। श्रीचरण तरणी दाने, दासे कर पार॥
भावार्थमैं इस भौतिक जगत के सागर में, अत्याधिक प्रचंड तूफान से आक्रांत लहरों के बीच में धकेला गया हूँ, जिसमें से बच कर नहीं निकला जा सकता। कृपया अपने दिव्य चरण कमलों का उपहार मुझे दे दें, जिसकी तुलना एक नाव से की गई है जिसमें बैठकर तुम्हारा दास जन्म और मृत्यु के सागर को पार कर सके।
5
श्रीकृष्ण चैतन्य प्रभु, दासेर अनुदास। प्रार्थना करये सदा, नरोत्तम दास॥
भावार्थश्रीकृष्ण चैतन्य प्रभु के दास का दास, नरोत्तम दास निरन्तर यह प्रार्थना करता है।