1गौराङ्ग तुमि मोरे दया ना छाडिहो
आपन करिया रांगा चरणे राखिहो॥
भावार्थहे गौरांग! मुझे आप अपनी कृपा से वंचित न करें। मुझे अपना बनाकर अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान कीजिए।
2तोमार चरण लागि सब तेयगिलु
शीतल चरण पाया शरण लोइलु॥
भावार्थआपके श्रीचरण प्राप्ति हेतु मैंने मेरे सर्वस्व का त्यागकर दिया है। अब मैंने आपके शीतल चरणों का पूर्णरूप से आश्रय लिया है।
3एइ कुले ओ कुले मुञी दिलु तिलाञ्जलि
राखिहो चरणे मोरे आपनार बोली॥
भावार्थमैंने इस कुल और उस कुल को पूर्णरूपेन त्याग दिया है, अब आप कृपा करके मुझे अपना कहकर अपने श्रीचरणों में रखिए।
4वासुदेव घोषे बोले चरणे धरिया।
कृपा करी राखो मोरे पद-छाया दिया॥
भावार्थश्रील वासुदेव घोष कहते हैं, हे गौरांङ्ग। मैं आपके चरणों को धारण करके प्रार्थना करता हूँ कि कृपा करके मुझे अपने चरणों की छाया में ही रखिए।