1गाय गोरा मधुर स्वरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥धृ॥
भावार्थभगवान गौरांग बहुत ही मधुर स्वर में गाते हैं- हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे॥
2गृहे थाको वने थाको, सदा हरि बले डाको,
सुखे दुःखे भुल नाको।
वदने हरिनाम कर रे॥
भावार्थचाहे आप घर में रहे, या वन में रहें, सदा निरन्तर हरि का नाम पुकारें “हरि! हरि!” चाहे आप जीवन की सुखद स्थिति में हों, या आप दुखी हों, हरि के नाम का इस तरह उच्चारण करना मत भूलिए।
3मायाजाले बद्ध हये, आछ मिछे काज ल’ये,
एखनओ चेतन पे’ये।
राधा माधव नाम बोलो रे॥
भावार्थहे जीवो! आप माया जाल के चंगुल में फँस गए हैं, अतः आप सदा वयर्थ के कार्यों में वयस्त रहते हैं। अब अपने होश में आइये और राधा-माधव के नामों का उच्चारण कीजिए।
4जीवन हइल शेष, ना भजिले हृषीकेश,
भक्तिविनोद-(एइ) उपदेश,
एक बार नामरसे मात रे॥
भावार्थआपका जीवन किसी भी क्षण समाप्त हो सकता है, और आपने अपनी इन्द्रियों के स्वामी ऋषिकेश, श्री कृष्ण की आराधना नहीं की उनकी सेवा अभी तक नहीं की। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर जी की सलाह मानिए, “केवल एक बार, भगवान् के पवित्र नाम के अमृत रस में मदहोश होकर, उसका आस्वादन कीजिए!”