International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

हरि बल हरि बल

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
हरि बल हरि बल हरि बल भाई रे हरिनाम आनियाछे गौरांग-निताई रे (मोदेर दुःख देखे रे)॥
भावार्थहे भाइयों! हरि का नाम बोलो, हरि का नाम बोलो, हरि का नाम बोलो। भगवान्‌ गौरांग तथा भगवान्‌ नित्यानंद हमारी दुखभरी स्थिति देखकर हरि का पवित्र नाम लाए हैं।
2
हरिनाम बिना जीवेर अन्य धन नाइ-रे हरिनामे शुद्ध हल जगाइ-माधाइ रे (बड़ पापी छिलरे)॥
भावार्थहरि के पवित्र नाम के अतिरिक्त, जीवों के लिए और कोई धन-संपत्ति नहीं है। भगवान्‌ के पवित्र नाम का कीर्तन करने से जगाई एवं मधाई शुद्ध हो गए। वे बहुत बड़े पापी थे।
3
मिछे मायाबद्ध हये जीवन काटाइ रे (आमि आमार बले रे) आश-वशे घुरे घुरे आर कोथा याइ रे (आशार शेष नाइ रे)॥
भावार्थमैं मोहमयी शक्ति, माया द्वारा मिथ्या रूप से बद्ध होकर, अपना जीवन वयतीत कर रहा हूँ। मैं हर वस्तु को ‘मैं’ और ‘मेरा’ से संबंधित ही देखता हूँ। अब मैं कहाँ जा सकता हूँ? भौतिक इच्छाओं का तो कोई अंत ही नहीं है।
4
हरि ब’ले देओ भाइ आशार मुखे चाइ रे (निराशा त’सुख रे) भोग-मोक्ष-वाच्छा छाड़ि हरिनाम गाइ रे (शुद्ध-सत्व हय रे)॥
भावार्थहरि के पवित्र नाम के उच्चारण द्वारा भौतिक आकांक्षाओं की अग्नि पर जल डालो। हे भाइयों! कामना रहित होना ही प्रसन्नता का कारण है। भौतिक आनन्द और मुक्ति की इच्छाओं को त्याग दो। शुद्ध सत्त्व के गुणों में स्थित रहकर, हरि के नाम का उच्चारण करो।
5
नाचेओ नामेर गुणे ओ-सब फल पाइ रे (तुच्छ फले प्रयास छेड़े रे) विनोद बले याइ लये नामेर बालाइ रे, (नामेर बालाइ छेडे़ रे)॥
भावार्थये उपेक्षणीय, महत्त्वहीन फल- भौतिक आकांक्षाओं एवं मुक्ति का परिपूर्ण होना- पवित्र नाम के सद्‌गुणों द्वारा सरलता से प्राप्त किए जा सकते हैं। उनके लिए अलग से परिश्रम-प्रयास करने की या पूछने की आवश्यकता नहीं है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर कहते हैं कि भगवान्‌ पवित्र नाम के जप के मार्ग में आयी सारी बाधाएँ या रुकावटों को दूर ले जाने के लिए तैयार हैं बशर्ते कि व्यक्ति द्वारा भगवान्‌ के पवित्र नाम का जप बिना किसी अपराध के किया जाए।