International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

हरि हरये नमः

Composed by नरोत्तम दास ठाकुर

1
हरि हरये नमः कृष्ण यादवाय नमः। यादवाय माधवाय केशवाय नमः॥
भावार्थहे भगवान्‌ हरि, हे प्रभु श्रीकृष्ण, मैं आपको नमन करता हूँ। आप यादव, हरि, माधव तथा केशव नामों से जाने जाते हैं।
2
गोपाल गोविंद राम श्री मधुसूदन। गिरिधारी गोपीनाथ मदनमोहन॥
भावार्थहे गोपाल, गोविंद, राम, श्री मधुसूदन, गिरिधारी, गोपीनाथ, मदनमोहन!
3
श्री चैतन्य नित्यानंद श्री अद्वैत-सीता। हरि गुरु वैष्णव भागवत गीता॥
भावार्थश्रीचैतन्य और नित्यानंद की जय हो। श्री अद्वैत आचार्य तथा उनकी भार्या श्रीमती सीता ठाकुरानी की जय हो। भगवान्‌ श्री हरि, गुरू, वैष्णवजन, श्रीमद्‌भागवत तथा श्रीमद्‌ भगवद्‌गीता की जय हो।
4
श्री रूप सनातन भट्‌ट-रघुनाथ। श्री जीव गोपाल भट्‌ट दास-रघुनाथ॥
भावार्थश्रीरूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, रघुनाथ भट्‌ट गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी, गोपाल भट्‌ट गोस्वामी और रघुनाथ गोस्वामी की जय हो।
5
एइ छह गोसाँईर करि चरण वंदन। जहाँ होइते विघ्न-नाश अभीष्ट-पुरण॥
भावार्थमैं इन छह गोस्वामियों के चरणों को वंदन करता हूँ। उनको वंदन करने से भक्ति के विघ्नों का नाश होता है तथा अभीष्ट इच्छा पूर्ण होती है।
6
एइ छइ गोसाँई जार-मुइ तार दास। तां सबार पद-रेणू मोर पंच-ग्रास॥
भावार्थमैं इन छह गोस्वामियों के सेवक का सेवक हूँ। उन सबके चरणों की धूल मेरा पंच-ग्रास है।
7
तांदेर चरण-सेवी-भक्त-सने वास। जनमे-जनमे होए एइ अभिलाष॥
भावार्थमेरी यही अभिलाषा है कि मैं इन छह गोस्वामियों के चरणों की सेवा करने वाले भक्तों के संग जन्म-जन्मांतर वास करूँ।
8
एइ छइ गोसाइ जबे ब्रजे कोइला वास। राधा-कृष्ण-नित्य-लीला करिला प्रकाश॥
भावार्थइन छह गोस्वामियों ने जब ब्रज में वास किया था, तो इन्होंने राधा-कृष्ण की नित्य लीला का प्रकाश किया था।
9
आनंदे बोलो हरि भज वृंदावन। श्री गुरु-वैष्णव-पदे मजाइया मन॥
भावार्थअपने मन को श्री गुरू और वैष्णवों के दिव्य चरणों को ध्यान में लगाकर, आनंदपूर्वक हरि के नामों का उच्चारण करो, तथा वृन्दावन का भजन करो।
10
श्री-गुरु-वैष्णव-पाद-पद्‌म करि आश। नाम-संकीर्तन कहे नरोत्तम दास॥
भावार्थश्री गुरू और वैष्णवों के पदमों की आशा करता हुआ, नरोत्तम दास हरिनाम-संकीर्तन करता है।