International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

हरि हरि कबे मोर ह’बे हेन दिन

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
हरि – हरि कबे मोर ह’बे हेन दिन विमल वैष्णवे, रति उपजिबे, वासना हइबे क्षीण॥
भावार्थहे हरि! मेरा ऐसा दिन कब आएगा, जब मेरे हृदय से समस्त प्रकार की विषय वासनाएँ नष्ट हो जाएँगी तथा विमल (शुद्ध) वैष्णवों के श्रीचरण कमलों में मेरी रति उत्पन्न हो जाएगी।
2
अन्तर – बाहिरे, सम व्यवहार, अमानि मानद ह’ब कृष्ण – संकिर्तने, श्रीकृष्ण – स्मरणे, सतत मजिय र’ब॥
भावार्थअन्दर तथा बाहर में मेरा व्यवहार एक समान होगा अर्थात् मेरा हृदय निष्कपट हो जाएगा तथा मैं अमानी (अपना सम्मान न चाहकर) एवं मानद (दूसरों को सम्मान प्रदान करूँगा) होऊँगा तथा निरन्तर श्रीकृष्ण के कीर्तन स्मरण में निमग्न रहूँगा।
3
ए देहेर क्रिया, अभ्यासे करिब, जीवन यापन लागि श्रीकृष्ण भजने, अनुकूल याहा, ताहे ह’ब अनुरागी॥
भावार्थकेवल मात्र जीवन निर्वाह के उपयुक्त शारीरिक क्रियाओं को करूँगा तथा श्रीकृष्ण भजन के अनुकूल विषयों में मेरी प्रीति होगी।
4
भजनेर याहा, प्रतिकूल ताहा, दृढभावे तेयागिबो भजिते – भजिते, समय आसिले, ए देह छाडिया दिब॥
भावार्थमैं भजन के प्रतिकूल विषयों का दृढ़तापूर्वक परित्याग करूँगा। इस प्रकार भजन करते-करते समय आने पर मैं इस शरीर को त्याग दूँगा।
5
भक्तिविनोद, एइ अश करि’, वसिया गोद्रुमवने प्रभु – कृपा लागि’, व्याकुल अन्तरे, सदा काँदे संगोपने॥
भावार्थभक्तिविनोद इसी आशा के साथ गोद्रुम वन में बैठकर सर्वदा प्रभु की कृपा के लिए व्याकुल हृदय से एकान्तमें निरन्तर रोता रहता है।