International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

हरि हे दयाल मोर

Composed by अज्ञात

1
हरि हे दयाल मोर जय राधा-नाथ। बारो बारो एइ-बारो लह निज-साथ॥
भावार्थहे हरि! हे मेरे दयालु ईश्वर! आपकी जय हो? हे राधाजी के स्वामी! मैंने आपसे बार-बार विनयपूर्वक याचना की है, और अब मैं पुनः आपसे विनती करता हूँ कि मुझे अपना बना लो, अपना समझकर मुझे स्वीकार कर लीजिए।
2
बहु योनी भ्रमि’ नाथ! लोइनु शरण। निज-गुणे कृपा कर’ अधम-तारण॥
भावार्थहे भगवान्‌! निराशपूर्ण होकर, बारंबर जन्म लेते हुए, अब मैं शरण लेने के लिए आपके पास आया हूँ। कृपया अपना दयापूर्ण स्वभाव प्रदर्शित कीजिए और इस दुष्ट आत्मा का उद्धार कीजिए।
3
जगत-कारण तुमि जगत-जीवन। तोमा छाड़ा केऽनाहि हे राधा-रमण॥
भावार्थआप इस ब्रह्माण्ड के कारण हो (ब्रह्मांण्ड को उत्पन्न करने वाले), और इसके प्राण-आधार हो। हे राधाजी के प्रेमी, आपके अतिरिक्त, कोई आश्रय नहीं है।
4
भुवन-मङ्गल तुमि भुवनेर पति। तुमि उपेक्षिले नाथ, कि होइबे गति॥
भावार्थआप इस संसार के लिए शुभ मंगल सौभाग्य लाते हो, और साथ ही आप समस्त लोकों के स्वामी हो। हे भगवान्‌, यदि आप मुझे छोड़कर चले जाओंगे तो मेरा क्या होगा?
5
भाविया देखिनु एइ जगत-माझारे। तोमा बिना केह नाहि ए दासे उद्धारे॥
भावार्थमैंने समझ लिया है, मैं जान चुकाँ हूँ। अपनी दुखद स्थिति पर विचार या मनन करने के पश्चात्‌, कि इस संसार में आपके अतिरिक्त और कोई भी नहीं है जो इस सेवक या दास का उद्धार कर सके।