International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

जय राधा गिरिवर धारि

Composed by कृष्णदास कविराज गोस्वामी

1
जय राधा गिरिवर धारि श्रीनंद नंदन वृषभानु – दुलारि॥
भावार्थवृषभानु महाराज की दुलारी श्रीराधारानी की जय हो! नन्द महाराज के प्रिय पुत्र गिरिवरधारी की जय हो!
2
(वृषभानु दुलारि राधे वृषभानु – दुलारि) मोर – मुकुट मुख मुरली जोरि वेणी विराजे मुखे हासि थोरि॥
भावार्थउनके मुकुट में मोरपंख एवं मुख पर मुरली सुशोभित है। उनकी लटें अत्यन्त मनोहारी एवं मुखारविन्द पर मंद मुस्कान है।
3
उनकि शोहे गले वनमाला इनकि मोतिमा – माला – उजाला॥
भावार्थउनके गले में वनफूलों की सुन्दर माला है एवं कण्ठ में मोतियों की माला जगमगा रही है।
4
पीताम्बर जग – जन – मन मोहे नील उढानि बनि उनकि शोहे॥
भावार्थकृष्ण के पीले वस्त्र सम्पूर्ण जगत्‌ के लोगों का मन हर रहे हैं और राधारानी के नीले वस्त्र अत्यन्त सुन्दर लग रहे हैं।
5
अरुण चरणे मणि – मञ्जिर बाओये श्रीकृष्ण – दास तहिं मन भाओये॥
भावार्थदोनों के लालिमायुक्त चरणों पर मणियों की पायल मधुर ध्वनि कर रही है और युगलकिशोर का यह दर्शन कृष्णदास के मन को अत्यन्त भावविभोर कर रहा है।