International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

जय राधे जय कृष्ण

Composed by कृष्णदास कविराज गोस्वामी

1
जय राधे, जय कृष्ण, जय वृन्दावन। श्रीगोविन्द, गोपीनाथ, मदन-मोहन॥
भावार्थराधा-कृष्ण तथा वृंदावन धाम की जय हो। श्री गोविंद, गोपीनाथ तथा मदनमोहन- वृंदावन के इन तीन अधिष्ठाता विग्रहों की जय हो।
2
श्यामकुण्ड, राधाकुण्ड, गिरि-गोवर्धन कालिन्दी यमुना जय, जय महावन॥
भावार्थश्यामकुण्ड, राधाकुण्ड, गिरिगोवर्धन तथा यमुना की जय हो। कृष्ण और बलराम के बाल्य क्रीडास्थल महावन की जय हो।
3
केशी घाट, वंशि वट, द्वादश कानन। याहा सब लीला कोइलो श्रीनन्द नन्दन॥
भावार्थजहाँ कृष्ण ने केशी राक्षस का वध किया था, उस केशी-घाट की जय हो। जहाँ कृष्ण ने अपनी मुरली से सब गोपिकाओं को आकर्षित किया था, उस वंशी-वट की जय हो। व्रज के द्वाद्वश वनों की जय हो, जहाँ नन्दनंदन श्रीकृष्ण ने सब लीलायें कीं।
4
श्रीनन्द-यशोदा जय, जय गोपगण। श्रीदामादि जय जय, धेनु वत्स-गण॥
भावार्थकृष्ण के दिवय माता-पिता, नंद और यशोदा की जय हो। राधारानी और अनंग मंजरी के बड़े भााई श्रीदामा सहित सब गोपबालकों की जय हो। व्रज के सब गाय-बछड़ों की जय हो।
5
जय वृषभानु, जय कीर्तिदा सुन्दरी। जय पौर्णमासी, जय अभीर-नागरी॥
भावार्थराधाजी के दिवय माता-पिता, वृषभानु और कीर्तिदा की जय हो। संदीपनि मुनि की मां, मधुमंगल व नंदीमुखी की दादी एवं देवर्षि नारद की प्रिय शिष्या- पौर्णमासी की जय हो। व्रज की युवा गोपिकाओं की जय हो।
6
जय जय गोपीश्वर, वृन्दावन माझ। जय जय कृष्ण सखा, बटु द्विज-राज॥
भावार्थपवित्र धाम के संरक्षणार्थ निवास करने वाले गोपीश्वर शिव की जय हो। कृष्ण के ब्राह्मण-सखा मधुमंगल की जय हो।
7
जय राम घाट, जय रोहिणी नन्दन। जय जय वृन्दावन, वासी यत जन॥
भावार्थजहाँ बलराम जी ने रास रचाया था, उस राम-घाट की जय हो। रोहिणीनंदन बलराम जी की जय हो। सब वृंदावनवासियों की जय हो।
8
जय द्विज पत्नी, जय नाग कन्या-गण। भक्तिते जाहार पाइलो, गोविन्द-चरण॥
भावार्थगर्वीले यज्ञिक ब्राह्मणों की पत्नियों की जय हो। कालिय नाग की पत्नियों की जय हो, जिन्होंने भक्ति के द्वारा गोविन्द के श्रीचरणों को प्राप्त किया।
9
श्री रास-मंडल जय, जय राधा-श्याम। जय जय रास लीला, सर्वमनोरम॥
भावार्थश्री रासमण्डल की जय हो। राधा और श्याम की जय हो। कृष्ण की लीलाओं में सबसे मनोरम, रासलीला की जय हो।
10
जय जयोज्ज्वल-रस-सर्व रससार। परकीया भावे याहा, व्रजेते प्रचार॥
भावार्थसमस्त रसों के सारस्वरूप माधुर्यरस की जय हो, भगवान्‌ कृष्ण ने परकीय-भाव में जिसका प्रचार ब्रज में किया।
11
श्री जाह्नवी-पाद-पद्म करिया स्मरण। दीन कृष्णदास कहे, नाम-संकीर्तन॥
भावार्थनित्यानंद प्रभु की संगिनी श्री जाह्नवा देवी के चरणकमलों का स्मरण कर यह दीन-हीन कृष्णदास नाम संकीर्तन कर रहा है।