International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

कि रूपे पाइब सेवा

Composed by नरोत्तम दास ठाकुर

1
कि रूपे पाइब सेवा मुइ दुराचार। श्रीगुरु-वैष्णवे रति ना हैल आमार॥
भावार्थओह! मुझे श्रीगुरु-वैष्णवों के चरणों में लेश मात्र भी रति नहीं है, मैं पापी, दुराचारी हूँ। अतः किस प्रकार भगवान्‌ की सेवा प्राप्त करूँगा?
2
अशेष मायाते मन मगन हइल। वैष्णवेते लेशमात्र रति ना जन्मिल॥
भावार्थमेरा मन सर्वदा विषयों में मग्न रहता है तथा मुझे वैष्णवों में लेश मात्र भी अनुराग उत्पन्न नहीं हुआ।
3
विषय भुलिया अन्ध हैनु दिवानिशि। गले फाँस दिते फिरे माया से पिशाची॥
भावार्थदिन-रात विषयभोगों के कारण मैं अन्धा हो गया हूँ। गले में फंदा डालने के लिए मायारूपी पिशाची मेरे पीछे-पीछे घूम रही है।
4
इहारे करिया जय छाड़ान ना याय़। साधु कृपा बिना आर नाहिक उपाय॥
भावार्थअब, तो साधु (वैष्णवों) की कृपा के अतिरिक्त इस मायारूपी पिशाची से बचने का काई उपाय नहीं दीखता।
5
अदोष-दरशि प्रभु, पतित उद्धार। एइबार नरोत्तमे करह निस्तार॥
भावार्थश्रील नरोत्तमदास ठाकुर कहते हैं कि, ‘‘हे वैष्णव ठाकुर! आप तो पतितों के उद्धारक, अदोषदर्शी हैं, अतः इस बार मेरा उद्धार कीजिए। ’’