International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

नमो नमः तुलसी कृष्णप्रेयसी

Composed by कृष्णदास कविराज गोस्वामी

1
नमो नमः तुलसी कृष्णप्रेयसी। राधा-कृष्ण-सेवा पाब एइ अभिलाषी॥
भावार्थभगवान्‌ श्रीकृष्ण की प्रियतमा हे तुलसी देवी! मैं आपको बारम्बार प्रणाम करता हूँ। मेरी एकमात्र इच्छा है कि मैं श्रीश्रीराधाकृष्ण की प्रेममयी सेवा प्राप्त कर सकूँ।
2
ये तोमार शरण लय, तार वाञ्छा पूर्ण हय। कृपा करि कर’तेारे वृन्दावनवासी॥
भावार्थजो कोई भी आपकी शरण लेता है उसकी कामनाएँ पूर्ण होती हैं। उस पर आप अपनी कृपा करती हैं और उसे वृन्दावनवासी बना देती हैं।
3
मोर एइ अभिलाष, विलासकुंजे दिओ वास। नयने हेरिबो सदा युगल-रूप-राशि॥
भावार्थमेरी यही अभिलाषा है कि आप मुझे भी वृन्दावन के कुंजों में निवास करने की अनुमति दें, जिससे मैं श्रीराधाकृष्ण की सुन्दर लीलाओं का सदैव दर्शन कर सकूँ।
4
एइ निवेदन धर, सखीर अनुगत कर। सेवा-अधिकार दिये कर निज दासी॥
भावार्थआपके चरणों में मेरा यही निवेदन है कि मुझे किसी ब्रजगोपी की अनुचरी बना दीजिए तथा सेवा का अधिकार देकर मुझे आपकी निज दासी बनने का अवसर दीजिए।
5
दीन कृष्णदासे कय, एइ येन मोर हय। श्रीराधा-गोविन्द-प्रेमे सदा येन भासि॥
भावार्थअति दीन कृष्णदास आपसे प्रार्थना करता है, “मैं सदा सर्वदा श्रीश्रीराधागोविन्द के प्रेम में डूबा रहूँ। ”
6
तुलसी प्रदक्षिणा मन्त्र यानि कानि च पापानि ब्रह्महत्यादिकानि च। तानि-तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिणः पदे-पदे॥
भावार्थश्रीमती तुलसी देवी की परिक्रमा करने से प्रत्येक पद पर ब्रह्महत्यापर्यन्त सभी पापों का नाश होता है।
7
श्री तुलसी प्रणाम वृन्दायै तुलसी देवयै प्रियायै केशवस्य च। विष्णुभक्तिप्रदे देवी सत्यवत्यै नमो नमः॥
भावार्थहे वृन्दे, हे तुलसी देवी, आप भगवान्‌ केशव की प्रिया हैं। हे कृष्णभक्ति प्रदान करने वाली सत्यवती देवी, आपको मेरा बारम्बार प्रणाम है।