International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

नारद मुनि बाजाय विणा

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
नारद मुनि बाजाय वीणा राधिका-रमण-नामे। नाम आमनि उदित हय, भकत-गीत-सामे॥
भावार्थजैसे ही महान संत नारदजी अपने वाद्य यंत्र वीणा बजाते हैं, और “राधिका-रमण” नाम का उच्चारण करते हैं वैसे ही भगवान का पवित्र नाम भक्तों के कीर्तन के बीच में स्वयं ही प्रकट हो जाता है।
2
अमिय-धारा वरिषे घन श्रवण-युगल गिया। भकत-जन सघने नाचे भरिया आपन हिया॥
भावार्थभगवान्‌ का पवित्र नाम, वर्षा ऋतु के बादल के समान निरन्तर अमृत रस की वर्षा करता है। जब ये भगवन्नाम, भक्तों के कानों में प्रवेश करता हैं, तो वे प्रेमपूर्ण परम आनन्द के भाव में, जी भरकर नृत्य करते हैं।
3
माधुरी-पुर आसव पशि माताय जगत-जने। केह वा काँदे, केह वा नाचे, केह माते मने मने॥
भावार्थपवित्र भगवन्नाम द्वारा बरसाये गए अमृतमय मधुर पेय को पीकर, विश्व के समस्त लोग, पूरी तरह से नशे में मस्त हो गए। उनमें से कुछ प्रेमानन्द के कारण रोने लगे, कुछ भाव में नृत्य करने लगे, और कुछ लोग, जो नृत्य नहीं कर पा रहे थे वे अपने मन में ही नृत्य करने लगे।
4
पञ्च-वदने नारद धरि प्रेमेर सघन रोल। कमलासन, नाचिया बले, ‘बल बल हरि बल’॥
भावार्थपंचमुखी शिवजी , नारद मुनि का आलिंगन करते हुए, भगवान के प्रति प्रेमानन्द से भावविभोर होकर जोर से गरजे। भगवान्‌ ब्रह्मा ने भी, जो कमल के पुष्प पर आसीन रहते हैं, प्रेमानन्द में नृत्य किया और प्रत्येक से बार-बार “हरि” बोलने के लिए विनती की।
5
सहस्रानन, परम-सुखे ‘हरि-हरि’ बलि गाय। नाम-प्रभावे मातिल विश्व नाम-रसे सबे पाय॥
भावार्थसहस्र शीश वाले अनंत भगवान ने भी परम सुख की अनुभूति सहित “हरि-हरि” बोलते हुए भगवन्नाम का गान किया। पवित्र भगवन्नाम के प्रभाव से संपूर्ण विश्व के लोग आप्लावित हो गए और प्रत्येक व्यक्ति ने पवित्र नाम के मधुर रस का आस्वादन किया।
6
श्री-कृष्ण नाम रसने स्फुरि पूराल आमार आश। श्री-रुप-पदे याचये इहा भकतिविनोद-दास॥
भावार्थमैं, भक्ति विनोद दास, श्री रूप गोस्वामी के चरण कमलों में यह याचना या आशीर्वाद माँगता हूँ कि कृष्ण का पवित्र नाम, मेरी जिह्वा पर प्रकट होकर मेरी समस्त आकांक्षाएँ परिपूर्ण करे।