International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

निताई नाम हाटे ओ के जाबिरे भाइ

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
निताई नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ, आय छुटे एशे पाषण्ड जगाई माधाई दु – जन सकल हाटेर माल निले जुटे॥
भावार्थओ भाइयों! पवित्र नाम के हाट में नित्यानंद उपस्थित हैं। जो भी उन्हें देखने के लिए आ रहा हैं, भाग कर आओ ! दो बड़े दुष्ट शैतान, जगाई और माधाई ने हाट लूट लिया हैं और सारी संपत्ति ले ली हैं।
2
हाटेर अंशी महाजन, श्री अद्वैत, सनातन भंडारी श्रीगदाधर पण्डित विचक्षण॥
भावार्थवहां आपको अंशी महाजन मिलेंगे, श्री अद्वैत आचार्य और सनातन गोस्वामी। निपुण गदाधर पंडित भंडारी हैं।
3
आछेन चौकिदार हरिदास आदि हलेन श्री सञ्जय श्री श्रीधर माते दालाल केशव भारती, श्री विद्या वाचस्पति परिचारक आछेन कृष्णदास प्रभृति होन कोषाध्यक्ष श्रीवास पण्डित, झाडुदार केदार जुते॥
भावार्थहरिदास ठाकुर और अन्य कुछ लोग चौकीदार हैं, संजय और श्रीधर संवाहक हैं, केशव भारती तथा विद्या-वाचसपति दलाल हैं, तथा कृष्णदास तथा कुछ अन्य लोग सेवक हैं। श्रीवास पंडित कोषाध्यक्ष हैं और केदारनाथ उपयुक्त रूप से झाड़ूदार हैं।
4
हाटे र मूल्य निरुपण, नयभक्ति प्रकाशन प्रेम हेनो मुद्रा सर्वसार, संयमन नाइ कमी बेशी समान॥
भावार्थहाट में समान का मूल्य नवधा भक्ति मय सेवा की विधि हैं, खरीदने के लिए मुद्रा प्रेम हैं, जो उत्तम रस हैं। सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं हैं। यहाँ, दोनों प्रकार के ग्राहक- जिनके पास बहुत संपत्ति हैं या जिनके पास कम संपत्ति हैं - सभी एक समान माने जाते हैं।
5
ओ, जन रे, सब एतो मने बोझाय उठे एइ प्रेमेर उद्देश, एक साधु उपदेश सुधा – मोय हरिनाम रूप सु – संदेश, एते बरो नाइ रे द्वेशाद्वेश खाय एक पाते कानु – कुठे॥
भावार्थअरे लोगों, जितना भी सामान चाहिए उतना भर लो - यहाँ कोई आभाव नहीं हैं। यह भगवत प्रेम प्राप्त करने के लिए अच्छा परामर्श हैं। इस हाट का शुभ समाचार भगवान हरि के अमृतमय नाम के रूप में आता हैं। इस आशीर्वाद को प्राप्त करते समय, कोई दुर्भावना या पक्षपात ना हो। चाहे वह जो हो, सबको एक ही थाली से खाने दो।