International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

राधा कृष्ण प्राण मोर

Composed by नरोत्तम दास ठाकुर

1
राधाकृष्ण प्राण मोर युगल-किशोर। जीवने मरणे गति आर नाहि मोर॥
भावार्थयुगलकिशोर श्री श्री राधा कृष्ण ही मेरे प्राण हैं। जीवन-मरण में उनके अतिरिक्त मेरी अन्य कोई गति नहीं है।
2
कालिन्दीर कूले केलि-कदम्बेर वन। रतन वेदीर उपर बसाब दुजन॥
भावार्थकालिन्दी (यमुना) के तटपर कदम्ब के वृक्षों के वन में, मैं इस युगलजोड़ी को रत्नों के सिंहासन पर विराजमान करूँगा।
3
श्याम गौरी अंगे दिब चन्दनेर गन्ध। चामर ढुलाब कबे हेरिब मुखचन्द्र॥
भावार्थमैं उनके श्याम तथा गौर अंगों पर चन्दन का लेप करूँगा, और कब उनका मुखचंद्र निहारते हुए चामर ढुलाऊँगा।
4
गाँथिया मालतीर माला दिब दोंहार गले। अधरे तुलिया दिब कर्पूर ताम्बूले॥
भावार्थमालती पुष्पों की माला गूँथकर दोनों के गलों में पहनाऊँगा और कर्पूर से सुगंधित ताम्बुल उनके मुखकमल में अर्पण करूँगा।
5
ललिता विशाखा आदि यत सखीवृन्द। आज्ञाय करिब सेवा चरणारविन्द॥
भावार्थललिता और विशाखा के नेतृत्वगत सभी सखियों की आज्ञा से मैं श्रीश्रीराधा-कृष्ण के श्री चरणों की सेवा करूँगा।
6
श्रीकृष्णचैतन्य प्रभुर दासेर अनुदास। सेवा अभिलाष करे नरोत्तमदास॥
भावार्थश्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के दासों के अनुदास श्रील नरोत्तमदास ठाकुर दिवय युगलकिशोर की सेवा-अभिलाषा करते हैं।