1राधे! जय जय माधव दयिते।
गोकुल-तरुणी मण्डल-मोहिते॥
भावार्थहे राधे! हे माधव की प्रिया! गोकुल की सब तरूणियों द्वारा वंदित देवी, आपकी जय हो!
2दामोदर-रतिवर्धन-वेशे।
हरिनिष्कुट-वृन्दाविपिनेशे॥
भावार्थआप भगवान् दामोदर के प्रेम को बढ़ाने वाले वेश धारण करती हैं। भगवान् श्री हरि को सुख देने वाले वृन्दावन की आप महारानी हैं।
3वृषभानुदधि - नवशशिलेखे।
ललिता सखीगण रमित विशाखे॥
भावार्थमहाराज वृषभानु रूपी सागर से उदित आप नव चन्द्र-स्वरूपा हैं। आप ललिता की सखी हैं, एवं सौहार्द-कारूण्य-कृष्णानुकूल्य आदि अद्भुत गुणों से आप विशाखा को अपने वशीभूत करती हैं।
4करुणां कुरु मयि करुणा भरिते।
सनक सनातन-वर्णित चरिते॥
भावार्थआपका दिव्य चरित्र सनक-सनातन जैसे महान संतो द्वारा वर्णित होता है। हे राधे, मुझ पर करूणा करो।