International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
श्री-कृष्ण-चैतन्य प्रभु जीवे दया करि’। स्व-पार्षद स्वीय धाम सह अवतरि’॥
भावार्थपतित जीवात्माओं पर दयावश, भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु इस संसार में अपने पार्षदों एवं निज धाम सहित अवतीर्ण हुए।
2
अत्यन्त दुर्लभ प्रेम करिबारे दान। शिखाय शरणागति भकतेर प्राण॥
भावार्थश्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु ने अत्यन्त दुर्लभ कृष्णप्रेम का दान दिया तथा उन्होंने शरणागति के सिद्धांत सिखाए, जो कि भक्तों के जीवन एवं प्राण हैं।
3
दैन्य, आत्मनिवेदन, गोप्तृत्वे वरण। ‘अवश्य रक्षिबे कृष्ण’-विश्वास, पालन॥
भावार्थशरणागति के सिद्धांत हैं - विनम्रता, कृष्ण के प्रति आत्म-समर्पण, कृष्ण को अपना पालनकर्ता स्वीकार करना, यह दृढ़ विश्वास होना कि कृष्ण अवश्य ही रक्षा करेंगे,
4
भक्ति-अनुकूल-मात्र कार्येर स्वीकार। भक्ति-प्रतिकूल-भाव वर्जन-अंगीकार॥
भावार्थउन कार्यो को स्वीकार करना जो कृष्ण भक्ति के अनुकूल हों तथा उन कार्यो को त्यागना जो कृष्ण भक्ति के प्रतिकूल हों।
5
षडंग शरणागति हइबे याँहार। ताँहार प्रार्थना शुने श्री-नन्द-कुमार॥
भावार्थकृष्ण, जो कि नन्द महाराज के पुत्र हैं, उन लोगों की प्रार्थनाएँ सुनते हैं जिन्होंने शरणागति के इन छः सिद्धांतों को आत्मसात्‌ कर लिया है।
6
रूप-सनातन-पदे दन्ते तृण करि’। भकतिविनोद पड़े दूहूँ पद धरि’॥
भावार्थअपने दाँतों में घास का तिनका रखकर, श्रील भक्तिविनोद ठाकुर श्री रूप गोस्वामी एवं श्री सनातन गोस्वामी के चरणकमलों पर गिरते हैं।
7
काँदिया काँदिया बले-’आमि त’ अधम। शिखाये शरणागति कर-हे उत्तम॥
भावार्थरोते-रोते वे कहते हैं, “मैं सर्वाधिक पतित हूँ। अतएव, कृपा करके मुझे शरणागति की शिक्षा देकर उत्तम बना दीजिये। ”