1नमः ॐ विष्णुपादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले।
श्रीमते भक्तिसिद्धान्त-सरस्वती इति नामिने॥
भावार्थकृष्ण-सम्बन्ध-विज्ञान के दाता,
2श्रीवार्षभानवी-देवी-दयिताय कृपाब्धये।
कृष्ण-सम्बन्ध-विज्ञान-दायिने प्रभवे नमः॥
भावार्थकृष्ण के प्रिय, श्रीवृषभानवी देवी राधिका के प्रियपात्र, इस भूतल पर अवतीर्ण ॐ विष्णुपाद श्रीमद् भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी नामक कृपा-वारिधि प्रभु की वन्दना करता हूँ।
3माधुर्योज्ज्वल-प्रेमाढ्य-श्रीरूपानुग-भक्तिद।
श्रीगौर-करुणा-शक्ति-विग्रहाय नमोऽस्तुते॥
भावार्थजो माधुर्य के द्वारा उज्ज्वलित, प्रेमपूर्ण, श्रीरूपानुग-भक्ति प्रदान करने वाले तथा श्रीगौरांग महाप्रभु की करुणा-शक्ति के विग्रह-स्वरूप हैं, उन सरस्वती ठाकुर को मैं पुनः नमस्कार करता हूँ।
4नमस्ते गौर-वाणी-श्रीमूर्तये दीन-तारिणे।
रूपानुग-विरुद्धापसिद्धान्त-ध्वान्त-हारिणे॥
भावार्थजो गौर-वाणी के मूर्तिमान स्वरूप हैं, दीनों को तारने वाले हैं तथा श्रील रूप गोस्वामी द्वारा प्रणीत भक्तिमय सेवा के सिद्धान्तों से विरुद्ध कोई कथन सहन नहीं करते।