International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

सुन्दर कुण्डल

Composed by वासुदेव घोष

refrain
जय माधव मदनमुरारी राधेश्याम श्यामाश्याम। जय केशव कलिमलहारी राधेश्याम श्यामाश्याम।।
भावार्थश्रीलक्ष्मीपति की जय हो! मुर राक्षस के शत्रु भगवान्‌ मदनमुरारि की जय हो! श्री श्रीराधा-श्याम की जय हो, जो श्यामा-श्याम के नाम से भी जाने जाते हैं। कोमल केश वाले भगवान्‌ केशव की जय हो। वे कलियुग के कष्टों को हरण करने वाले हैं - राधेश्याम, श्यामा- श्याम!
1
सुन्दर कुण्डल नैन विशाला, गले सोहे वैजयन्तीमाला। या छवि की बलिहारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थहे कृष्ण, आप सुन्दर कुण्डल धारण करते हैं और आपके मधुर नयन अत्यन्त विशाल हैं। आपके कण्ठ में वैजयन्ती माला सुशोभित है। आपकी यह छवि अत्यन्त मनोहर है - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
2
कबहूँ लूट-लूट दथधि खायो, कबहूँ मधुबन रास रचायो। नाचत विपिनविहारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थकई बार आप गुपचुप माखन चुराकर खाते हैं और कई बार आप मधुबन में गोपियों के साथ रासलीला रचाते हैं। आप वृन्दावन के वनों में विहार करते हैं - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
3
ग्वालबाल संग धेनु चराई, वन वन भ्र त फिरे यदुराई। काँघे कामर कारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थअपने ग्वालमित्रों के संग आप गायें चराते हैं। आप यदुवंश- शिरोमणि हैं और अपने कंधे पर काला कम्बल लिए विभिन्न वनों में भ्रमण करते हैं - राधेश्याम, श्यामाश्याम!
4
चुरा चुरा नवनीत जो खायो, व्रज-वनितन पै नाम धरायो। माखनचोर मुरारि ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थहे मुरारि! चूँकि आपने बार-बार व्रजगोपियों के घरों से ताजा माखन चुराया है, उन्होंने आपका नाम रखा है 'माखनचोर' - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
5
एकदिन मान इन्द्र को मारयो, नख ऊपर गोवर्धन धारयो। नाम पड्यो गिरिधारी।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थएक दिन आपने गोवर्धन पर्वत को अपने नाखून पर उठाकर इन्द्र का गर्व चूर- चूर किया और इसलिए आपका नाम पड़ा गिरिधारी - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
6
दुर्योधन का भोग न भायो, रूखो साग विदुर घर खायो। ऐसे प्रेम -पुजारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थआपने दुष्ट दुर्योधन द्वारा अर्पित छप्पन भोग त्याग दिये और अपने भक्त विदुर द्वारा अर्पित रुखा साग खाया। इसलिए केवल प्रेम द्वारा ही आपकी पूजा की जा सकती है, बाहम आडम्बरों से नहीं- राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
7
करुणा कर द्रौपदी पुकारी, पट में लिपट गये वनवारी। निरख रहे नर नारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थजब द्रौपदी ने कातर भाव में आपको पुकारा तो वनों में भ्रमण करने वाले हे श्रीकृष्ण! आपने वस्त्र प्रदान करके उसकी लाज बजाई। सभी लोग इस अद्भुत दृश्य को देखते रह गये - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
8
भक्त-भक्त सब तु ने तारे, बिना भक्ति हम ठाड़े द्वारे। लीजो खबर हमारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थआप अपने प्रत्येक भक्त की विशेष प्रकार से रक्षा करते हैं। किन्तु दुर्भाग्य से हम भक्तिहीन आपके द्वार पर खड़े हैं। कृपया हमारी ओर भी थोड़ा ध्यान दीजिए - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!
9
अर्जुन के रथ हाँकन हारे, गीता के उपदेश तुम्हारे। चक्र-सुदर्शनधारी ।। राधेश्याम श्यामाश्याम
भावार्थआप अर्जुन के सारथी बने और युद्धभूमि में उन्हें भगवद्वीता के उपदेश सुनाये। युद्धभूमि में आपने सुदर्शनधारी का अपना रूप प्रकट किया - राधेश्याम, श्यामा-श्याम!