International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare
Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare

Vaishnav Bhajan

विद्यार विलासे

Composed by भक्तिविनोद ठाकुर

1
विद्यार विलासे, काटाइनु काल, परम साहसे आमि। तोमार चरण, ना भजिनु कभु, एखन शरण तुमि॥
भावार्थमैंने अपना समय अपने विद्योपार्जन के फलों को भोगने में व्यतीत कर दिया। मैंने आपके चरणकमलों का भजन करने की परवाह नहीं की परन्तु अब मैं आपको अपना आश्रय स्वीकार करता हूँ।
2
पढ़िते पढ़िते, भरसा बाढ़िल, ज्ञाने गति हबे मानि’। से आशा विफल, से ज्ञान दुर्बल, से ज्ञान अज्ञान जानि। ॥
भावार्थअपने विद्याध्ययन के दौरान मुझे दृढ़ विश्वास हो गया कि भौतिक ज्ञान के द्वारा मुझे अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त हो जाएगा परन्तु मेरी लालसा फलोत्पादक नहीं रही क्योंकि भौतिक ज्ञान तुच्छ है और अविद्या (मोह) का कारण है।
3
जड़-विद्या यत, मायार वैभव, तोमार भजने बाधा। मोह जनमिया, अनित्य संसारे, जीवके करये गाधा॥
भावार्थसमस्त प्रकार की भौतिक शिक्षा माया की चालें हैं तथा वास्तव में वे आपके भजन में बाधाएँ हैं। इस प्रकार की शिक्षा जीवात्माओं के मनों में मोह उत्पन्न करके जीव को इस अनित्य भौतिक जगत्‌ में गधा बना देती है।
4
सेइ गाधा ह’ये, संसारेर बोझा, बहिनु अनेक काल। वार्द्धक्ये एखन, शक्तिर अभावे किछु नाहि लागे भाल॥
भावार्थगधे की भाँति, मैंने अपने पारिवारिक जीवन का बोझ बहुत समय तक ढोया। अब मैं वृद्ध हो गया हूँ तथा शक्ति के अभाव मे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा ।
5
जीवन यातना, हइल एखन, से विद्या अविद्या भेल। अविद्यार ज्वाला, घटिल विषम, से विद्या हइल शेल॥
भावार्थअब मेरा जीवन मेरे लिए अत्यधिक कष्टप्रद बन गया है। मेरी शिक्षा मेरी अविद्या का कारण बन गई है। मेरी अविद्या मुझे तीव्र वेदना दे रही है मानो मुझे तीर मारा गया हो।
6
तोमार चरण, बिना किछु धन, संसारे ना आछे आर। भकतिविनोद, जड़-विद्या छाड़ि,’ तुया पद करे सार॥
भावार्थइस संसार में आपके चरणकमलों के अलावा अन्य कोई धन नहीं है। अतएव, भक्तिविनोद ठाकुर समस्त प्रकार की भौतिक शिक्षा को त्याग कर, आपके चरणकमलों को ही सार रूप में स्वीकार करते हैं।