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राम कब आएंगे?
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राम कब आएंगे?

जब हम राम के आदर्शों को जीवन में उतारेंगे, तब वास्तव में राम आएंगे

📅 24 March 2026✍️ Jayati Radha Dasi

रामायण है एक दिव्य प्रचलित ग्रंथ, जिसकी है सबको जानकारी, पर प्रश्न तो यह है, रामायण की शिक्षाएं हमने कितनी जीवन में है उतारी? जब भगवान राम की शिक्षाओं को जीवन में उतार पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे ।

राजा दशरथ से कैकई ने कहा, याद है ना मेरे दो वरदान है आपके पास, कैकई ने मांगा, भरत के लिए राज्य और भगवान राम के लिए वनवास, जब कैकई की तरह राम की प्रसन्नता के लिए, बदनामी को झेल पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे।

कहा था राम ने, सीता से, तुम राजमहल में रहो, नहीं मिला है तुम्हें वनवास, सीता बोली, जहां मेरे पति रहेंगे, वही तो है मेरा वास्तविक आवास, जब भौतिक ऐश्वर्य और राम में से, राम को चुन पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे।

राम से दूर होकर भी भरत ने निभाया, सेवक बनकर अपना कर्तव्य, मन में था प्रेम, और जानते थे, भगवान राम के चरणकमल ही हैं मेरा गंतव्य। जब भरत की तरह राम के विरह में रो पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे ।

भरत तो वनवासी की तरह, कर रहे थे भगवान की पादुकाओं की सेवा, ऐसे में शत्रुघ्न ने उठाया राज्य को सुचारू रूप से चलने का बीड़ा, जब शत्रुघ्न की तरह अपने गम को भूल भगवान की सेवा में खो जाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे ।

शबरी को मतंग ऋषि ने, सेवा से प्रसन्न हो, दिया था आशीर्वाद, राम दर्शन देंगे, इस आस में रोज मीठे बेर चुनती, इंतजार करती दिन रात, जब शबरी की तरह प्रेम, विनम्रता और उत्साह से राम का इंतजार कर पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे ।

बहुत प्रयास किया जटायु ने, पर सीता को ले जाने से रावण को नहीं सका वह रोक, उसके प्रयास से वह हार कर भी जीत गया, अंत में पाकर प्रभु राम की गोद, जब जटायु की तरह हार निश्चित होने पर भी, प्रयास कर जाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे।

लक्ष्मण 14 वर्ष ना खाए ना ही सोए ,ऐसा था सीताराम के पति समर्पण, क्या हम कर सकते हैं, भगवान राम की सेवा में अपना पूरा जीवन अर्पण? जब लक्ष्मण की तरह हम भगवान राम की सेवा के लिए कुछ भी कर जाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे।

विभीषण रहते थे लंका में, जैसे कोमल जीहवा हो बीच 32 दांत, असुरों के मध्य रहकर भी, नहीं आने दी भक्ति में कोई भी आंच, जब विभीषण की तरह विपरीत परिस्थिति में भी नाम जप कर पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे।

कामी था रावण, साधु का वेश धारण कर, किया सीता का अपहरण, अहंकार वश भूल गया, स्वयं भगवान है राम, हो गया था विस्मरण, जब काम और अहंकार रूपी आसुरी प्रवृत्ति को त्याग पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे

जब सीताराम ने, हनुमान को दिया था उपहार में मोतियों का हार, हर मोती तोड़कर ढूंढ रहे थे, इसमें होंगे राम, तो ही करूंगा इसे स्वीकार, जब हनुमान की तरह हृदय में राम को बसा पाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे ।

श्री प्रभुपाद कहते हैं, नहीं समा सकता हमारे मंदिरों में सारा संसार, पर हम प्रशिक्षण दे रहे हैं सभी को, करके भक्ति का प्रचार जब एक-एक करके सभी घर मंदिर बन जाएंगे, तब वास्तव में राम आएंगे। तब वास्तव में राम आएंगे।

🙏हरे कृष्ण 🙏

Jayati Radha Dasi
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Jayati Radha Dasi

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