मेरे गुरुदेव की बात ही कुछ निराली है! (1) हे मेरे गुरुदेव! चरण वंदन स्वीकार करें। कृष्णभावनामृत में रहके हर व्यासपूजा कुछ खास करें। दीर्घायु रहे आपकी, स्वस्थ स्वास्थ्य रहे सदा, नहीं योग्यता मेरी कुछ भी, नाँ ही कोई ऋण अदा। दूजा जन्म आपसे पाया, अच्युत पत्नी नाम मन भाया, मिलती रहे पनाह, छावनी। मेरे गुरुदेव की बात ही कुछ निराली। (2) आपके सुविचारों से होती मेरी सुप्रभात है, वैष्णव भजनों में भी मिलती राग सुरताल है। शरणागत बनना आपसे सीखा, दिन गीता, भागवत में नित्य ही बीता, ध्येय बने यही हमारा, मुझे भी मंज़िल पानी है। मेरे गुरुदेव की बात ही कुछ निराली है। (3) युवाओं के प्राण निधान हो आप, धर्म और विज्ञान का तालमेल हो आप, मनोरंजन से हर एक के दिल में हो आप, 'डाउनलोड' शब्द आपका भारी है। मेरे गुरुदेव की बात ही कुछ निराली है। 'हरे कृष्णा, कोटि-कोटि प्रणाम गुरु महाराज!'

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2nd. Vyas Pooja of my Guru Bhakti aashray maharaj
Self written Poem - Mere gurudev ki baat hi kuchh nirali hai