सच्चे प्रेम और अटूट भक्ति का असली परिचय हैं भगवान कृष्ण। पहले मैं मंदिर जाता तो था, लेकिन वो भाव और खुशी नहीं होती थी, ऐसा लगता था जैसे बस एक क्रिया कर रहा हूँ। मानता था कि भगवान हैं, पर उनकी presence कभी सच में महसूस नहीं होती थी। फिर जब मैं ISKCON से जुड़ा, तो धीरे-धीरे अंदर बदलाव आने लगा। पहली बार जब माला जपी, तो शुरू में अजीब लगा, फिर थोड़ा boring भी लगा, लेकिन कुछ माला के बाद ही अंदर से आनंद आने लगा और भगवान कृष्ण के प्रति सच्चा प्रेम और भाव जागने लगा। और सबसे खास बात — ISKCON के भजन, श्रीमद्भागवतम् और नगर कीर्तन में जो आनंद मिला, वो शब्दों में नहीं बता सकता। प्रसादम तो ऐसा लगता है जैसे सीधे कृष्ण का प्रेम बरस रहा हो, इतना स्वाद और शांति देता है। अब समझ आता है कि असली भक्ति क्या होती है, और जीवन का सही मकसद भी साफ दिखने लगा है।
