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मन से बातें
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मन से बातें

मन पर विजय, भक्ति की ओर एक नई शुरुआत

📅 09 April 2026✍️ Jayati Radha Dasi

मेरा मन जो कई जन्मों से करता आ रहा है अपनी मनमानी, अब मैंने भी इसे अपने हिसाब से चलाने की है ठानी।

मन की बातों को मानकर न जाने मैंने कितनी नादानी की, इस मनुष्य जन्म में साधु संग में आकर अब मैंने अपनी गलती पहचानी।

अपनी हर इच्छा को मनवा लेता था यह मन, मैं करती तो थी आनाकानी, पर कहता था—अब नहीं जीएगी तो कब जीएगी, बीत जाएगी जिंदगानी।

बीमारी में भी आइसक्रीम खाने की जिद, तेरी ही तो थी कारस्तानी, तेरी बातों में आकर मैंने भी तो भर दी थी हामी।

हर रोज कुछ नया मांगता है यह मन, मैंने भी तो उसकी हर बात थी मानी, आज इस नए होटल में खाने चल, आज शॉपिंग चल—अब समझ आ रही है तेरी सारी शैतानी।

मैं जानती हूं यह तो है आपकी, मेरी, हम सबकी कहानी, मन तो हमारा शत्रु बना बैठा है, यह बात तो है सदियों पुरानी।

मैंने तो कह दिया—बस! अब बहुत हुआ, कर मुझ पर मेहरबानी, पुरानी बातों को पीछे छोड़ अब लिखनी है एक नई कहानी।

जानती हूं हे मन! तुझे यह बदलाव देखकर होगी हैरानी, पर अब और गलत काम नहीं करूंगी, यह तो मैंने भी ठानी।

"मनः त्रायते इति मंत्र"—अब तो मैंने रोज गंभीरता से माला उठानी, लगाना है तुझे भगवान की सेवा में, नहीं है तेरी अब कोई बात चलनी।

बहुत कोशिश की खुशी पाने की भोगों में, पर इसमें तो हो गई बहुत हानि, अब आजमा कर देख भगवत भक्ति को—होगी जरूर सफल जिंदगानी।

बैठ मेरे पास! दोनों मिलकर सुनते हैं भगवान और भक्तों की प्रेम कहानी, शुद्ध हो जाएंगे हम दोनों और नहीं करनी पड़ेगी माया की गुलामी।

चल! मान जाते हैं गुरु और शास्त्र की बात और बन जाते हैं एक अच्छे अनुगामी, शरण ले लेते हैं गुरु की, क्योंकि उन्होंने ही हमारी नैया पार लगानी है।

Jayati Radha Dasi
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Jayati Radha Dasi

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