जय नरसिंह
न मृगम न मानुषम विचार करें या फिर ज़रा आँखे बंद करके स्मरण करें, कल्पना की आवश्यकता नहीं हैं क्योंकि भगवान सत्य हैं कोई कल्पना नहीं. भगवान एक भक्त के लिए एक अदभुत रूप में प्रकट हुए जो न पूर्ण मनुष्य था और ना ही पूर्ण पशु.
सोचो...... यदि हमें कोई ऐसी वेशभूषा पहननी हों जहाँ हम, हम ना लगें तो? वैसे तो भगवान का यह रूप अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय हुआ, भक्त रक्षक के रूप में और यह तो स्वाभाविक भी है आखिर हमारे भगवान हैं ही इतने अद्भुत.
मुझे याद हैं कई साल पहले मैं किसी संस्था में गयी, बाहय रूप से यह आध्यात्मिक संस्था थीं पर शास्त्रों के दृष्टिकोण से ये मायावादी थे,क्या करें कलियुग है सत्य से ज़्यादा असत का बोलबाला है इसलिए प्रभुपाद कहते हैं - सावधान.
खैर उनसे मेरी बहुत बहस हुई, विषय था भगवान हैं या नहीं, उसका प्रमाण क्या है?मुझे उस समय Iskcon में ज़्यादा समय नहीं हुआ था परन्तु इतना विश्वास तो प्रभुपाद ने दे दिया था कि भगवान हैं..
उन्होंने अंतिम बाण मुझ पर छोड़ा यदि भगवान कोई व्यक्ति हैं तो क्या वह आपके लिए आएंगे जब आप समस्या में होंगे? मैं चुप थीं, मेरी क्या योग्यता, फिर कुछ सोचकर मेरी आँखे खिल उठी मैं तुनकर बोली, क्यों नहीं, आपको पता है एक भक्त थे , छोटे से, प्रहलाद... वे उस अकेले भक्त के लिए आ गए,तो मेरे लिए भी आएंगे ना, क्यों नहीं? तो फिर बुलाओ उन्हें हम भी देख ले भगवान कौन हैं - वे थोड़ा गुस्से से बोले मैं डरी नहीं, ना ही उनके चुनौती से हताश हुई, वे आएंगे जब मैं बुलाऊँगी, जब भी मैं किसी समस्या में फंस जाउंगी, क्यों नहीं आएंगे? मैं उनसे प्रेम करती हूँ. ये लो कुछ किताबें ले जाओ, ये तुम्हारे भ्रम को दूर करेंगी और हां! हमारा सेंटर है सूरत में, मेरे कहने पर एक बार visit कर लेना - वे बोले आपको कुछ भ्रम हैं शायद, आप आ जाना हमारे iskcon सेंटर पर मैं पूरे उत्साह से बोली वहां मेरे साथ खड़े कई लोग इस बहस को सुन रहें थे, उनका यह बैच तो बेकार हो गया था, वे मुझपर थोड़ा गुस्सा भी थे. और मैं, मानो एक जंग जीत गयी थी, बिलकुल नयी थी, शास्त्र नहीं जानती थी. उस पल में मुझे लगा जैसे नरसिम्हा आये थे, वो मेरी निडरता में थे, वो मेरे विश्वास में थे, वो मेरी उस प्रसन्नता में थे जो मुझे अंदर तक महसूस हो रही थी.मानो वो मेरे साथ थे.
May Lord Narsimha appears in our hearts.Happy Narsimha chaturdashi to all of us
