आज के समय में हर व्यक्ति मन की अशांति, चिंता, तनाव और असंतोष से घिरा हुआ है। बाहरी सुविधाएँ बढ़ती जा रही हैं, लेकिन भीतर का सुख और शांति कम होती जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमने अपने मन को भगवान श्रीकृष्ण से दूर कर दिया है।
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को मन की शांति का वास्तविक रहस्य बताते हैं।( 6.34)
“भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् । सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥”
अर्थात् — जो व्यक्ति भगवान को सभी यज्ञों और तपस्याओं का परम भोक्ता, समस्त लोकों का स्वामी तथा सभी जीवों का सच्चा हितैषी समझता है, वही वास्तविक शांति प्राप्त करता है।
आज हम शांति बाहर खोजते हैं — धन में, लोगों में, मोबाइल में, मनोरंजन में — लेकिन वास्तविक शांति केवल कृष्ण चेतना में ही प्राप्त होती है। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि “मैं भगवान का अंश हूँ और मेरा वास्तविक संबंध श्रीकृष्ण से है,” तब उसके जीवन में स्थिरता और संतोष आने लगता है।
