ACCEPT (कृष्ण की योजना को स्वीकार करना)
From the lecture of Hg Atul krishna prabhu ji
A———Accept Krishna’s plan and acknowledge His arrangement
भगवद्गीता 18.61 में भगवान कहते हैं कि वे सभी जीवों के हृदय में स्थित हैं और उनके मार्गदर्शन का प्रबंध करते हैं।
जब कोई परिस्थिति हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होती, तब भक्त सोचता है:
“कृष्ण की कोई गहरी योजना है, जिसे मैं अभी नहीं देख पा रहा हूँ, लेकिन वह मेरे आध्यात्मिक कल्याण के लिए ही है।”
C———Control Comparison
दूसरों से तुलना करना मन को अशांत करता है।
भगवद्गीता 3.35 में भगवान कहते हैं:
हर भक्त की सेवा, क्षमता, परिस्थिति और आध्यात्मिक यात्रा अलग है।
यदि हम बार-बार सोचते हैं:
* उसके पास अधिक सेवा है, * उसे अधिक सम्मान मिलता है, * उसका जीवन मुझसे बेहतर है,
तो हम कृष्ण द्वारा हमें दिए गए अवसरों की कद्र नहीं कर पाते।
C——Chant and Serve
जब मन असंतुष्ट होता है, तो उसका सर्वोत्तम उपचार है:
हरे कृष्ण महामंत्र का जप और सेवा।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
जप मन को शुद्ध करता है और सेवा हृदय को विनम्र बनाती है।
E——-Engage in Krishna’s Service with What We Have
अक्सर हम सोचते हैं:
* मेरे पास अधिक समय होता तो सेवा करता। * मेरे पास अधिक प्रतिभा होती तो सेवा करता। * मेरी परिस्थितियाँ बेहतर होतीं तो सेवा करता।
लेकिन कृष्ण यह नहीं देखते कि हमारे पास कितना है; वे यह देखते हैं कि हम जो कुछ भी है, उसे कितनी भावना से अर्पित करते हैं।
भगवद्गीता 9.26 में भगवान कहते हैं कि यदि कोई प्रेम से पत्र, पुष्प, फल या जल भी अर्पित करे, तो वे उसे स्वीकार करते हैं।
इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि “मेरे पास क्या नहीं है?”
P—Practice Internal Contentment (आंतरिक संतोष)
संतोष बाहरी परिस्थितियों से नहीं, कृष्ण से जुड़ाव से आता है।
भगवद्गीता 2.55 में स्थिरप्रज्ञ व्यक्ति का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जब मनुष्य मन की भौतिक इच्छाओं को त्यागकर आत्मा में संतुष्ट हो जाता है, तब वह स्थिर बुद्धि कहलाता है।
आंतरिक संतोष का अर्थ है:
* जो है उसके लिए कृतज्ञ रहना। * जो नहीं है उसके लिए शिकायत न करना। * कृष्ण की सेवा में आनंद खोजना।
T——-Trust Krishna’s Plan
भगवद्गीता 9.22 में भगवान आश्वासन देते हैं कि जो भक्त अनन्य भाव से उनकी शरण लेते हैं, उनके योगक्षेम का वहन वे स्वयं करते हैं।
भक्त का विश्वास होता है:
“मुझे सब कुछ समझ में आए या न आए, कृष्ण जानते हैं कि मेरे लिए क्या सर्वोत्तम है।”
