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द्वंद्वों के जगत से दिव्य जगत की ओर
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द्वंद्वों के जगत से दिव्य जगत की ओर

जीवन की वास्तविकता

📅 22 June 2026✍️ Jayati Radha Dasi

द्वंद्वों का जगत है,संभल के चलो, द्वंद्वों का जगत ।

हर क्षण संकट है,संभल के चलो ,हर क्षण संकट।

सुख दुख का जोड़ा साथ चले, राग द्वेष भी कोख में साथ पले, यश अपयश और जीत हार, साया सा सबका पीछा करे । सर्दी और गर्मी से बच ना सके, धूप छांव भी सब सह ही रहे, क्या है सत्य और क्या असत्य, ठीक से कोई परख ना सके। द्वंद्वों का जगत......

राजा और रंक भी देखे बड़े, मृत्यु की कतार में सब है खड़े, यहां शत्रु भी दिखते है सभी, मुखौटा मित्र का पहने हुए, अधर्म को धर्म दिखा करके, ढोंगी गुरुओं का राज चले, मट मैला चरित्र है जिनका, दावा वो पवित्र होने का करे। द्वंद्वों का जगत....

अब ऐसे जगत की ओर चलें, जहां द्वंद्वों का कोई शोर न हो, राग और द्वेष,का लेश न हो, बस प्रेम और आनंद प्रवेश करे। जहां मैं और मेरा का भाव न हो, कृष्ण चेतना का अभाव न हो, शुद्ध सेवा का स्वभाव रहे, प्रभु चरणों में हमारा लगाव रहे, तुम दिव्य जगत की ओर मुड़ो,अब दिव्य जगत।

वो धर्म जो वैराग्य की और चले, भगवान से राग उत्पन्न जो करे, भोक्ता नहीं ,हम भोग्य बने, अनन्य भक्ति के योग्य बने, सेवा की इच्छा अब मात्र रहे, कृष्ण लीला के हम पात्र बने, कई जन्मों से वे राह देख रहे, अब हम और विलंब न करे, तुम दिव्य जगत की ओर मुड़ो(चलो),अब दिव्य जगत। हर पल आनंद में डूबे रहो,हर पल आनंद।

Jayati Radha Dasi
Written by

Jayati Radha Dasi

Devotee