उड़िया नाथ से जगन्नाथ
आप ओड़िसा से बाहर जगन्नाथ का रथयात्रा उत्सव नहीं कर सकते, यह मान्य नहीं होगा... क्यों नहीं होगा? भगवान जगन्नाथ जगत के नाथ हैं, वे केवल उड़िया नाथ नहीं हैं.
ये कहानी है जगन्नाथ के एक ऐसे भक्त की, जिन्होंने जगन्नाथ रथयात्रा को एक नया आयाम दिया. अब तक केवल जगन्नाथ पुरी में होने वाली रथयात्रा, दुनिया के कोने कोने में मनाई जा रही है. यह जगत के नाथ जगन्नाथ का भव्य वैभव है और उनके भक्त श्रील प्रभुपाद का अदभुद गौरवशाली योगदान.
क्या यह एक भक्त की ज़िद्द थी या भगवान की इच्छा?
भला भक्त की ज़िद भगवान की इच्छा के विपरीत कैसे हो सकती है? तो यह अद्भुत चमत्कार हुआ कैसे? क्या आप यह कहानी सुनना चाहेंगे? प्रभुपाद San Francisco में प्रचार कर रहे थे और उनके कुछ शिष्य भी बन गए थे जो उनकी सहायता कर रहे थे. एक दिन उनकी एक शिष्या मालती माताजी वहां के एक इंडियन स्टोर में गयीं सोचा अपने गुरु महाराज के लिए कुछ भेंट लाएंगी और उन्हें प्रसन्न करेंगी. स्टोर में उन्हें तीन छोटी छोटी सुन्दर गुड़िया दिखीं परन्तु पैसे नहीं थे तो उन्होंने एक गुड़िया चुरा ली. अब आप ये मत सोचो कि भक्त भी ऐसा काम करते हैं, भाई ये चोर शिरोमणि के भक्त हैं तो कहानी कुछ तो रोमांचक होगा ना. जब इस गुड़िया को उन्होंने प्रभुपाद के सामने टेबल पर रखा, प्रभुपाद कि आंखे आश्चर्य से बड़ी हो गयीं वे अपने बिस्तर से कूद कर उठे और दंडवत प्रणाम किया. सभी हैरान थे. ये कौन हैं प्रभुपाद? आप इसे दण्डवत क्यों कर रहें हैं? ये जगन्नाथ हैं, पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान ... इनके साथ दो और भी गुड़िया होंगी जाओ उन्हें भी ले आओ. और इस तरह स्वयं जगन्नाथ ने ही अमेरिका में रथयात्रा की योजना बनाई थीं. शुद्ध भक्त भगवान के सन्देश को भली भांति समझते हैं 9 July 1967 San Francisco लोगों ने पहली बार जगन्नाथ जी के दर्शन किये, पहली बार उनका नाम सुनाऔर मुक्त हस्त से जगन्नाथ प्रसादम भी प्राप्त किया. हैं ना एकदम मज़ेदार कहानी....
अब मैं अपनी बात करूँ तो मेरे जैसे कितने लोगों के लिए पुरी जाकर भगवान के दर्शन करना, रथयात्रा देखना,किसी सपने जैसा ही था, ना तो प्रबल इच्छा थी ना ही कोई प्रबंध और फिर उन लोगों के बारे में क्या कहें जो विदेश में रहते हैं, नाम भी नहीं सुना कभी जगन्नाथ का. पर भक्त और भगवान दोनों एक से होते हैं, आकरण करुणा करने वाले. तुम नहीं आओगे तो मैं आता हूं तुम्हें दर्शन देने, तुम्हारे सब पाप हरने.... वो कहते हैं ना जब हम बीमार होते हैं तो हम डॉक्टर के पास जाते हैं पर जब हम बहुत बीमार होते हैं ना तब डॉक्टर हमारे पास आते हैं. बस यही है रथयात्रा का मर्म, तो आप आ रहें हैं ना डॉक्टर जगन्नाथ के दर्शन करने, वे अपने मंदिर से बाहर आएंगे आप अपने घर से बाहर ज़रूर निकलना, उन्हें दंडवत करना, प्रसाद लेना और कीर्तन में नाचते हुए कहना जय जगन्नाथ....
