International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

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स्टारफिश और छोटी बच्ची
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स्टारफिश और छोटी बच्ची

एक बार एक भयंकर तूफान आया। तेज़ हवाएँ चलीं, ऊँची-ऊँची लहरें उठीं और समुद्र का पानी किनारे तक आ गया।

भाषा:

एक बार एक भयंकर तूफान आया। तेज़ हवाएँ चलीं, ऊँची-ऊँची लहरें उठीं और समुद्र का पानी किनारे तक आ गया। तूफान शांत होने के बाद समुद्र तट का दृश्य बड़ा विचित्र था। हजारों स्टारफिश लहरों के साथ बहकर रेत पर आ गई थीं। अब तेज़ धूप निकल आई थी और वे धीरे-धीरे सूखने लगी थीं। उसी समुद्र तट पर टहलते हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति की नज़र दूर खड़ी एक छोटी बच्ची पर पड़ी। वह बच्ची बार-बार झुकती, रेत से एक स्टारफिश उठाती और उसे समुद्र में फेंक देती। फिर दूसरी उठाती… और उसे भी समुद्र में फेंक देती। बुजुर्ग व्यक्ति कुछ देर तक उसे देखते रहे। फिर उसके पास जाकर बोले, “बेटी, तुम क्या कर रही हो?” बच्ची ने मासूमियत से कहा, “मैं इन स्टारफिश को वापस समुद्र में डाल रही हूँ, ताकि ये जीवित रह सकें।” बुजुर्ग व्यक्ति मुस्कुराए और बोले, “लेकिन बेटी, यह समुद्र तट मीलों लंबा है। यहाँ हजारों नहीं, लाखों स्टारफिश पड़ी हैं। तुम उन सभी को तो नहीं बचा सकती। तुम्हारे इस छोटे से प्रयास से आखिर क्या फर्क पड़ेगा?” बच्ची कुछ क्षण के लिए रुकी। उसने नीचे देखा… रेत पर पड़ी एक और स्टारफिश उठाई… और पूरे प्रेम से उसे समुद्र की लहरों में उछाल दिया। फिर बुजुर्ग व्यक्ति की ओर देखकर मुस्कुराई और बोली— “शायद मैं उन सभी को नहीं बचा सकती… लेकिन इस एक के लिए तो फर्क पड़ गया।” बुजुर्ग व्यक्ति कुछ क्षण तक मौन रह गए। एक छोटी बच्ची ने उन्हें जीवन का बहुत बड़ा पाठ पढ़ा दिया था। इस छोटी बच्ची की तरह कभी-कभी हम भी जीवन में एक बहुत बड़े समुद्र तट के सामने खड़े होते हैं। चारों तरफ माया में फँसे हुए जीव हैं… कोई दुखी है, कोई भ्रमित है, कोई जीवन का उद्देश्य नहीं जानता, कोई भगवान से दूर जा रहा है। कभी-कभी प्रचार करते-करते हमारे मन में निराशा भी आने लगती है। हम सोचते हैं— “मैंने इतने लोगों को भगवद्गीता के बारे में बताया… इतने लोगों को हरिनाम के लिए प्रेरित किया… इतने लोगों को सत्संग में बुलाया… लेकिन कुछ ही लोग जुड़े। और जो जुड़े, उनमें से भी कुछ समय के साथ छँट गए। तो क्या मेरे प्रयास का कोई परिणाम हुआ?” ऐसे समय पर हमें भगवान श्रीकृष्ण के भगवद्गीता के शब्दों को याद करना चाहिए। "मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद् यतति सिद्धये। यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः॥" (भगवद्गीता 7.3) अर्थ: हजारों मनुष्यों में से कोई एक सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है, और सिद्धि प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करने वालों में से भी कोई विरला ही मुझे तत्त्व से जान पाता है। भगवान स्वयं कह रहे हैं कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलना कोई साधारण बात नहीं है। हजारों लोगों में से कोई एक व्यक्ति वास्तव में आत्म-साक्षात्कार के लिए प्रयास करता है। और उन प्रयास करने वालों में से भी कोई विरला ही भगवान को तत्त्व से जान पाता है। तो फिर यदि हम प्रचार करते हैं और हजारों में से केवल कुछ लोग ही वास्तव में गंभीर होकर कृष्णभावनामृत को अपनाते हैं, तो हमें निराश क्यों होना चाहिए? यह तो भगवान ने पहले ही बता दिया है कि यह मार्ग विरलों का मार्ग है। हमारा काम हर व्यक्ति को जबरदस्ती बदलना नहीं है। हमारा काम है— प्रयास करना। प्रेम से संदेश देना। भगवान का नाम पहुँचाना। एक अवसर देना। कौन उस अवसर को स्वीकार करेगा, कौन नहीं करेगा—यह हमारे हाथ में नहीं है। जैसे वह छोटी बच्ची समुद्र तट पर पड़ी हुई सारी स्टारफिश को नहीं बचा सकती थी… वैसे ही हम भी संसार के प्रत्येक जीव को तुरंत कृष्णभावनामृत में नहीं ला सकते। लेकिन… अगर हमारी बात से एक व्यक्ति का जीवन बदल गया… अगर हमारे द्वारा दिया गया एक भगवद्गीता का संदेश किसी के हृदय को छू गया… अगर हमारे निमंत्रण से एक व्यक्ति मंदिर आ गया… अगर हमारे द्वारा दिया गया एक हरिनाम किसी व्यक्ति के जीवन में भक्ति का बीज बो गया… हमें उस छोटी बच्ची की तरह कहना चाहिए— “शायद मैं सभी को कृष्ण से नहीं जोड़ सकता… लेकिन इस एक व्यक्ति के जीवन में तो फर्क पड़ सकता है।” और कौन जानता है? आज जिस एक व्यक्ति को आपने कृष्ण से जोड़ा है… कल वही व्यक्ति अपने परिवार को जोड़ेगा। फिर उसका परिवार दूसरों को जोड़ेगा। एक छोटा सा भक्ति का बीज… धीरे-धीरे एक विशाल वृक्ष बन सकता है। इसलिए प्रचार में कभी भी संख्या देखकर निराश नहीं होना चाहिए। हमारा अधिकार प्रयास पर है, परिणाम पर नहीं। हमें बस अपनी स्टारफिश उठाते रहना है… एक-एक जीव तक कृष्ण का संदेश पहुँचाते रहना है… एक-एक व्यक्ति को प्रेमपूर्वक हरिनाम देना है… एक-एक हृदय में भक्ति का बीज बोते रहना है। " क्योंकि शायद हम पूरी दुनिया को न बदल सकें… लेकिन हमारे एक छोटे से प्रयास से किसी एक की पूरी दुनिया बदल सकती है।" So Keep throwing the starfish back into the ocean… Keep giving people Krishna. क्योंकि शायद हजारों में से कोई एक ही आगे आए… लेकिन उस एक के लिए आपका प्रयास अनमोल हो सकता है।

हरे कृष्ण
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