एक बहुत अमीर व्यक्ति था महेश। उसका एक बहुत अच्छा दोस्त रमेश था।
एक दिन उसने सोचा— “मेरा रमेश हमेशा मेरी मदद करता है। मैं उसे कोई बहुत कीमती गिफ्ट दूँगा।”
अगले दिन वह अपने दोस्त के घर पहुँचा।
बाहर एक शानदार, चमचमाती हुई नई BMW खड़ी थी।
रमेश ने बाहर आकर देखा और हैरान रह गया।
महेश: “अरे वाह! ये BMW किसकी है?”
महेश मुस्कुराया। “तुम्हारी है!”
वह खुशी से उछल पड़ा। “मेरी? सच में? इतनी महंगी गाड़ी?”
उसने तुरंत गाड़ी का दरवाज़ा खोला। अंदर बैठा तो बोला— “वाह! क्या शानदार सीट्स हैं!” उसने बटन दबाया— “अरे! ऑटोमैटिक सीट एडजस्टमेंट!” फिर देखा— “सनरूफ भी है!” फिर— “प्रीमियम म्यूज़िक सिस्टम!” फिर— “एयरबैग्स, कैमरा, सेंसर,. वाह! इसमें तो हर सुविधा है!”
वह गाड़ी को देखकर इतना खुश था कि उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।
वह बोला— “यार! तुमने तो मेरी जिंदगी बना दी! ऐसी गाड़ी खरीदना मेरा सपना था!”
तभी उसका महेश थोड़ा गंभीर हो गया। उसने कहा— “हाँ, लेकिन एक छोटी सी बात है…”
वह बोला— “कोई बात नहीं! इतनी शानदार गाड़ी में छोटी-मोटी कमी तो हो ही सकती है। बताओ क्या कमी है?”
महेश ने कहा— “बस... इस गाड़ी के अंदर एक टाइम बॉम्ब फिट किया हुआ है।”
वह चौंक गया। “क्या? टाइम बॉम्ब?”
महेश बोला— “हाँ।” वह घबराकर बोला— “कब फटेगा?”
उसने कंधे उचकाए— “पता नहीं।”
“एक साल बाद?” “पता नहीं।” “ एक महीने बाद?” “पता नहीं।”
“आज?”
महेश ने कहा— “हाँ… आज भी फट सकता है।”
अब उस व्यक्ति का चेहरा बदल गया। जो अभी तक कह रहा था— “वाह! क्या गाड़ी है!” अब वह धीरे-धीरे गाड़ी से बाहर निकल आया।
उसने कहा— “तुम मजाक कर रहे हो ना?”
महेश बोला— “नहीं। गाड़ी बिल्कुल शानदार है। दुनिया की बेहतरीन सुविधाएँ हैं इसमें। बहुत आरामदायक है। बहुत कीमती है। लोग तुम्हें देखकर जलेंगे भी कि तुम्हारे पास इतनी शानदार BMW है…”
फिर उसने पूछा— “तो? लोगे ये गाड़ी?”
रमेश बोला— “नहीं! बिल्कुल नहीं!”
“क्यों?”
उसने कहा— “क्योंकि मुझे नहीं पता कि बॉम्ब कब फटेगा! अगर मैं इसमें बैठा और रास्ते में ही फट गई तो?”
फिर यहाँ कहानी का टर्निंग पॉइंट आता है…
हम उस व्यक्ति को मूर्ख नहीं कहेंगे। क्योंकि वह जानता है— “जिस वस्तु के नष्ट होने का समय कभी भी आ सकता है, उसके ऊपर पूरी जिंदगी की सुरक्षा और खुशी आधारित नहीं की जा सकती।”
लेकिन फिर प्रश्न है— हम क्या कर रहे हैं?
भगवान ने हमें एक बहुत ही शानदार “BMW” दी है— यह मानव शरीर।
इसमें कितनी अद्भुत सुविधाएँ हैं!
देखने के लिए आँखें सुनने के लिए कान सोचने के लिए बुद्धि बोलने के लिए वाणी और सबसे बड़ी बात— यह मानव शरीर हमें भगवान को जानने का अवसर देता है।
शास्त्र कहते हैं कि यह शरीर अत्यंत दुर्लभ है। लेकिन… इस BMW के अंदर भी एक टाइम बॉम्ब लगा हुआ है। उसका नाम है— "मृत्यु"
और सबसे बड़ी समस्या क्या है? हमें नहीं पता कि यह कब फटेगा। कोई 80 साल का होकर भी जीवित है। कोई 20 साल में चला जाता है। कोई सुबह स्वस्थ होता है और शाम को नहीं रहता। कोई घर से निकलता है और वापस नहीं आता।
हमने कितनी बार सुना है— “अरे! कल तक तो बिल्कुल ठीक थे…” हाँ। क्योंकि— टाइम बॉम्ब की डेट किसी को नहीं बताई गई।
श्रीमद्भागवतम् 11.9.29
"लब्ध्वा सुदुर्लभमिदं बहुसम्भवान्ते मानुष्यमर्थदमनित्यमपीह धीरः। तूर्णं यतेत न पतेदनुमृत्यु यावन् निःश्रेयसाय विषयः खलु सर्वतः स्यात्॥"
शिक्षा -अनेक जन्मों के बाद प्राप्त हुआ यह मानव शरीर अत्यंत दुर्लभ है। यद्यपि यह नश्वर है, फिर भी यह परम कल्याण प्रदान करने वाला है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि मृत्यु आने से पहले ही शीघ्रता से परम कल्याण के लिए प्रयास करे, क्योंकि इन्द्रिय-विषय तो जीवन में हर जगह उपलब्ध हैं।
“श्रीमद्भागवतम् कहता है—लब्ध्वा सुदुर्लभमिदं बहुसम्भवान्ते… अनेक जन्मों के बाद हमें यह दुर्लभ मानव शरीर मिला है।”
“मानुष्यमर्थदमनित्यमपीह—यह शरीर अर्थदम् है, हमें जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य दे सकता है, लेकिन अनित्यम् है—यह स्थायी नहीं है।”
“तो हमारे पास एक बहुत कीमती BMW है। बहुत मुश्किल से मिली है। उसमें अद्भुत सुविधाएँ हैं। उससे हम अपने जीवन के सर्वोच्च गंतव्य तक पहुँच सकते हैं।
लेकिन एक समस्या है—इसकी expiry date हमें नहीं पता।”
तूर्णं यतेत न पतेदनुमृत्यु यावन्। “मृत्यु आने से पहले, शीघ्रता से प्रयास करो।”
“भागवतम् कहता है—तूर्णम्! जल्दी करो! Spiritual life को postpone मत करो।”
“हम कहते हैं—अभी नहीं, retirement के बाद भजन करेंगे।”
भागवतम् कहता है— तूर्णम्! जल्दी करो!”
“हम कहते हैं—पहले बच्चों की शादी हो जाए।”
भागवतम् कहता है—तूर्णम्!”
“हम कहते हैं—अभी उम्र पड़ी है।”
भागवतम् कहता है—मृत्यु का समय किसी को नहीं पता!” इसलिए भक्ति को कल पर मत टालिए, क्या पता कल हम रहे न रहे?
