एक बार एक व्यक्ति ने अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई से एक बेहद सुंदर नई कार खरीदी। वह रोज़ उस गाड़ी को बड़े प्यार से साफ करता और चमकाकर रखता था।
एक दिन जब वह कार साफ कर रहा था, तभी उसका चार साल का छोटा बेटा वहाँ आ गया। बच्चे ने एक नुकीला पत्थर उठाया और कार के दरवाज़े पर कुछ खरोंचने लगा।
जब पिता ने अपनी नई चमचमाती कार पर खरोंचें देखीं, तो वह गुस्से से अपना आपा खो बैठा। क्रोध में अंधा होकर उसने यह भी ध्यान नहीं दिया कि उसके हाथ में एक भारी लोहे का पाना (wrench) था, जिससे वह कार पर काम कर रहा था। उसने उसी पाना से बच्चे के नन्हे हाथ पर कई बार ज़ोर-ज़ोर से मार दिया।
बच्चे के हाथ से खून बहने लगा और वह दर्द से चीखने लगा। जब पिता का गुस्सा शांत हुआ और उसने बच्चे का हाथ देखा, तो उसके होश उड़ गए। वह तुरंत उसे अस्पताल ले गया।
डॉक्टरों ने बताया कि कई जगह हड्डियाँ टूट जाने और उंगलियाँ बुरी तरह कुचल जाने के कारण उन्हें काटना पड़ेगा। ऑपरेशन के बाद जब बच्चे को होश आया, तो उसने अपनी पट्टी बंधी हुई हथेली को देखा। उसकी आँखों में आँसू थे।
उसने मासूमियत से अपने पिता से पूछा— “पापा, मेरी उंगलियाँ वापस कब आएँगी?” यह सुनकर पिता का दिल टूट गया। उसके पास उस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था।
वह पिता पश्चाताप से भरा हुआ रोता-रोता घर लौटा। गुस्से और दुख में वह अपनी ही कार को लात मारने लगा। तभी उसकी नज़र उस जगह पर पड़ी जहाँ बच्चे ने खरोंच की थी। वहाँ बच्चे की टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट में लिखा था— “I LOVE YOU DAD” उसकी आँखें आंसुओं से भर गई पर अब पछताने से क्या लाभ?बेटे की उंगलियां तो वापस नहीं आएंगी।
भगवान भगवत गीता में कहते हैं(३.३७) - "काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥" यह काम (अत्यधिक इच्छा) और क्रोध ,जो रजोगुण से उत्पन्न होता है। यह सब कुछ निगल जाने वाला और महान पाप का कारण है; इसे मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु जानो।

शिक्षा -गुस्से में लिया गया एक पल का निर्णय, जीवन भर का पछतावा बन सकता है।
