International Society for Krishna Consciousness

Founder Acharya — HDG A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

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"​किसान और गधा" — कठिनाइयों को सीढ़ी बनाओ
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"​किसान और गधा" — कठिनाइयों को सीढ़ी बनाओ

एक बूढ़ा गधा सूखे कुएँ में गिर गया। वह बाहर निकलने के लिए बहुत चिल्लाया, लेकिन कुआँ गहरा था और किसान उसे बाहर निकालने में असमर्थ था।

भाषा:

एक बूढ़ा गधा सूखे कुएँ में गिर गया। वह बाहर निकलने के लिए बहुत चिल्लाया, लेकिन कुआँ गहरा था और किसान उसे बाहर निकालने में असमर्थ था। ​किसान ने सोचा— “गधा भी बूढ़ा है और कुआँ भी पुराना है। इसे निकालना बहुत कठिन है। क्यों न इस कुएँ को मिट्टी से भरकर बंद कर दिया जाए?” ​उसने पड़ोसियों को बुलाया। सब लोग फावड़ों से मिट्टी उठाकर कुएँ में डालने लगे। शुरू-शुरू में जब मिट्टी गधे की पीठ पर गिरती, तो वह डर के मारे जोर-जोर से चिल्लाता। उसे लगा कि अब उसका अंत निश्चित है। ​लेकिन कुछ देर बाद… वह शांत हो गया। ऊपर खड़े किसान को आश्चर्य हुआ। उसने कुएँ में झाँककर देखा तो वह हैरान रह गया। ​गधे ने एक अद्भुत उपाय खोज लिया था। जब भी उसकी पीठ पर मिट्टी गिरती—वह उसे अपनी पीठ से झटक देता और उस मिट्टी के ढेर पर एक कदम ऊपर चढ़ जाता। फिर मिट्टी गिरती… वह उसे झटक देता… और एक कदम ऊपर चढ़ जाता। ​धीरे-धीरे, वही मिट्टी जो उसे दबाने के लिए डाली जा रही थी, उसके लिए बाहर निकलने की सीढ़ी बन गई। अंततः वह कुएँ की मुंडेर तक पहुँच गया और सुरक्षित बाहर निकल आया।

शिक्षा : 'Why me?' या 'Try me!' ​विपत्ति आने पर एक सामान्य व्यक्ति रोकर पूछता है—"Why me?" (मेरे साथ ही ऐसा क्यों?) लेकिन एक समर्पित भक्त का भाव होता है—"Try me, my Lord!" (हे प्रभु, मैं तैयार हूँ!) ​भक्त के जीवन में भी जब कष्टों की मिट्टी गिरती है, तो वह उसके नीचे दबता नहीं। वह श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के इस शरणागति भाव को जीता है: ​"तुया दास्य-सुख, दुःख यदि हय, से दुःख परम सम्पद तय।" (हे प्रभु! आपकी सेवा और भक्ति के मार्ग पर यदि कोई दुःख या संकट आता है, तो वह दुःख मेरे लिए विपत्ति नहीं, मेरी परम संपत्ति है।) ​भक्त उस परिस्थिति को कृष्ण की योजना मानकर स्वीकार करता है। वह धैर्य रखता है, प्रार्थना करता है और उस कठिनाई को अपनी चेतना से झटककर आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ी बना लेता है। वह जानता है कि हर संकट उसे शुद्ध करने आया है, इसलिए वह शिकायत करने के बजाय हर परिस्थिति में केवल अपने कृष्ण का हाथ देखता है। ​“A materialistic person asks: Why me? A devotee says: Try me! Because a devotee sees Krishna’s hand and mercy in every situation.”
हरे कृष्ण
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