एक समय की बात है, एक गरीब व्यक्ति बहुत परेशान था। वह दिन-रात कड़ी मेहनत करता था, लेकिन फिर भी अपने परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पाता था। वह सोचता था कि काश मेरे पास कोई ऐसी जादुई शक्ति होती, जो मेरे सारे काम पलक झपकते ही कर देती। वह अपनी इस इच्छा को लेकर जंगल में रहने वाले एक सिद्ध महात्मा (साधु) के पास गया। उसने साधु के पैर पकड़ लिए और रोते हुए कहा, "महाराज! मुझे कोई ऐसी जादुई शक्ति या कोई ऐसा सेवक दे दीजिए जो मेरे सारे काम तुरंत कर दे, ताकि मैं अमीर बन सकूँ और आराम से रह सकूँ।" साधु दूरदर्शी थे, वे जानते थे कि बिना मेहनत के मिलने वाली शक्ति विनाश लाती है। उन्होंने उसे बहुत समझाया, लेकिन जब वह व्यक्ति नहीं माना, तो साधु ने अपनी कुटिया से एक जादुई चिराग निकाला और उसे रगड़कर एक विशाल और शक्तिशाली जिन्न (Genie) को प्रकट किया। साधु ने उस व्यक्ति से कहा, "देखो, मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर रहा हूँ। यह जिन्न आज से तुम्हारा सेवक है। यह दुनिया का बड़े से बड़ा काम कुछ ही सेकंडों में कर सकता है। तुम इससे जो मांगोगे, यह तुम्हें लाकर देगा। परंतु इसकी एक अत्यंत भयानक शर्त है!" व्यक्ति ने उत्सुकता से पूछा, "कैसी शर्त, महाराज?" साधु ने गंभीर होकर कहा, "इस जिन्न को हर समय कोई न कोई काम (Busy) चाहिए। यदि तुमने इसे एक पल के लिए भी बिना काम के खाली छोड़ दिया, तो यह तुम्हें जिंदा चबा जाएगा, तुम्हें खा जाएगा।" व्यक्ति ने खुशी-खुशी कहा, "महाराज, इसकी चिंता आप मत कीजिए। मेरे पास कामों की इतनी बड़ी लिस्ट है कि यह जिंदगी भर खाली नहीं बैठेगा।" व्यक्ति जिन्न को लेकर अपने घर आ गया। जिन्न की असीमित रफ्तार घर पहुँचते ही व्यक्ति ने आदेश दिया, "जिन्न! मेरे लिए एक आलीशान महल बनाओ!" जिन्न ने चुटकी बजाई—"जो आज्ञा आका!" और एक सेकंड में आलीशान महल बनकर तैयार हो गया। व्यक्ति ने फिर कहा, "महल के आगे एक सुंदर बगीचा बनाओ और तिजोरी को सोने-चांदी से भर दो!" जिन्न ने कहा—"यह लीजिए आका!" और तुरंत बगीचा भी बन गया और तिजोरी भी भर गई। अब व्यक्ति घबराने लगा। उसने जो भी बड़े-बड़े काम सोचे थे, जिन्न उन्हें कुछ ही सेकंडों में खत्म कर रहा था। व्यक्ति ने कहा, "मेरे लिए दुनिया का सबसे स्वादिष्ट छप्पन भोग तैयार करो।" जिन्न ने पलक झपकते ही भोजन सामने रख दिया और लाल आँखें करके बोला, "आका! अगला काम दो, नहीं तो मैं तुम्हें खा जाऊँगा!" अब वह व्यक्ति डर के मारे कांपने लगा। उसके पास सारे काम खत्म हो चुके थे और जिन्न उसे खाने के लिए आगे बढ़ रहा था। अपनी जान बचाने के लिए वह व्यक्ति दोबारा भागता हुआ जंगल में उसी साधु की कुटिया की तरफ दौड़ा। जिन्न भी उसके पीछे-पीछे भाग रहा था। साधु का अचूक उपाय भागते-भागते वह व्यक्ति साधु के चरणों में गिर गया और हांफते हुए बोला, "महाराज! मुझे बचाइए! इस जिन्न ने मेरे सारे काम खत्म कर दिए हैं। अब यह मुझे खाने आ रहा है। मुझे यह जिन्न नहीं चाहिए, इसे वापस ले लीजिए!" साधु मुस्कुराए और उन्होंने कहा, "घबराओ मत। जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो। कुटिया के बाहर एक बहुत लंबा लकड़ी का खंभा (Pole) गड़ा हुआ है। तुम जिन्न से कहो कि वह उस खंभे पर ऊपर चढ़े और नीचे उतरे।" व्यक्ति तुरंत पलटा और जिन्न से बोला, "सुनो! तुम्हारा अगला काम यह है कि तुम इस खंभे पर ऊपर चढ़ो और फिर नीचे उतरो। और जब तक मैं तुम्हें कोई दूसरा काम न दूँ, तब तक तुम लगातार इस खंभे पर ऊपर चढ़ते और नीचे उतरते रहो!" जिन्न ने कहा, "जो आज्ञा आका!" और वह उस खंभे पर ऊपर चढ़ने और नीचे उतरने लगा। अब वह लगातार व्यस्त हो गया। जब भी व्यक्ति को कोई जरूरी काम होता, वह जिन्न को बुला लेता और काम खत्म होते ही कहता, "चलो, वापस खंभे पर चढ़ो!" इस तरह व्यक्ति की जान भी बच गई और उसे एक वफादार सेवक भी मिल गया।
कहानी का आध्यात्मिक संदेश
श्रील प्रभुपाद और संत समझाते हैं कि यह जिन्न कोई और नहीं, बल्कि हमारा अपना "मन" (Mind) है: १.मन एक जिन्न की तरह शक्तिशाली है: हमारा मन इस जिन्न की तरह ही असीमित शक्तियों से भरा है। यह एक सेकंड में हमें अमेरिका पहुँचा देता है, तो दूसरे सेकंड में अतीत की यादों में। यह बहुत तेजी से योजनाएं बनाता है। २.खाली मन शैतान का घर (Idle Mind is Devil's Workshop): साधु ने कहा था कि यदि जिन्न को खाली छोड़ दिया, तो वह तुम्हें खा जाएगा। ठीक इसी तरह, यदि हम अपने मन को खाली छोड़ दें, तो यह हमें चिंता, अवसाद (Depression), बुरे विचारों और वासनाओं के रूप में अंदर ही अंदर खाना शुरू कर देता है। अशांत मन इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। ३.लकड़ी का खंभा क्या है? (The Pole of Chanting): साधु द्वारा बताया गया वह लकड़ी का खंभा वास्तव में "भगवान का नाम (हरे कृष्ण महामंत्र का जप)" है। जब मन के पास संसार का कोई काम न हो, तो उसे खाली छोड़कर भटकने देने के बजाय, उसे भगवान के नाम रूपी खंभे पर लगा देना चाहिए—"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे"। ४.मन को सेवक कैसे बनाएं? जब हम मन को लगातार हरिनाम जप, शास्त्र पढ़ने (Bhagavad Gita) और कृष्ण सेवा में व्यस्त रखते हैं, तो यही जिन्न रूपी मन हमारा सबसे अच्छा मित्र और सेवक बन जाता है, जो हमें आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर ले जाता है। जैसा कि गीता (6.6) में कृष्ण कहते हैं—"जिसने मन को जीत लिया है, उसका मन उसका सबसे अच्छा मित्र है।"
हमें मन को कभी खाली नहीं छोड़ना चाहिए। मन को नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका उसे दबाना नहीं है, बल्कि उसे 'कृष्ण भावनामृत' (Krishna Consciousness) के दिव्य खंभे में व्यस्त कर देना है।
