
दीक्षा के लिए योग्यता
एक बार एक भक्त दीक्षा लेना चाहता था। वह अपने गुरुजी के पास गया और विनम्रतापूर्वक बोला, “गुरुजी, कृपया मुझे दीक्षा प्रदान कीजिए।”
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Inspiring spiritual stories, timeless teachings and lessons for daily devotional life.

एक बार एक भक्त दीक्षा लेना चाहता था। वह अपने गुरुजी के पास गया और विनम्रतापूर्वक बोला, “गुरुजी, कृपया मुझे दीक्षा प्रदान कीजिए।”
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एक समय की बात है, शहर का बड़ा खेल मैदान दर्शकों की भारी भीड़ से खचाखच भरा हुआ था।
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एक बार दो मित्र आपस में मिले। पहले मित्र ने दूसरे से पूछा— “तुम सच में इन सब बातों पर विश्वास करते हो?”
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एक जंगल में एक साधारण सियार रहता था। एक दिन भोजन की तलाश में वह पास के गाँव में जा पहुँचा।
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एक जंगल में एक कौआ रहता था। खुले आसमान में उड़ना और अपनी मस्ती में जीना ही उसका स्वभाव था; उसे किसी चीज़ की कोई कमी नहीं लगती थी।
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एक नदी के किनारे एक बहुत विशाल, गठीला और मजबूत ओक (बरगद जैसा विशाल) का पेड़ खड़ा था।
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बहुत समय पहले की बात है, एक घने और हरे-भरे जंगल के पास एक छोटा सा गाँव बसा हुआ था। उसी गाँव में एक बूढ़ी अम्मा अपनी छोटी सी झोपड़ी में अकेली रहती थीं।
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एक गाँव में छह अंधे व्यक्ति रहते थे। वे सभी जन्म से दृष्टिहीन थे, लेकिन बहुत जिज्ञासु थे। वे संसार की हर वस्तु को छूकर, महसूस करके और समझने का प्रयास करते थे।
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एक समय की बात है। एक बहुत बड़ा राजा था। उसके पास अपार धन-संपत्ति थी। विशाल महल, सोना-चाँदी, हीरे-जवाहरात, सेवक, सैनिक—किसी भी भौतिक सुविधा की उसके जीवन में कमी नहीं थी।
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एक बहुत अमीर व्यक्ति था महेश। उसका एक बहुत अच्छा दोस्त रमेश था।
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एक बार एक भयंकर तूफान आया। तेज़ हवाएँ चलीं, ऊँची-ऊँची लहरें उठीं और समुद्र का पानी किनारे तक आ गया।
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